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लॉटरी कारोबार पर पाबंदी को लेकर राज्यों में गुटबंदी
एम जे एंटनी / नई दिल्ली August 13, 2014

उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश ने हाल ही में अहमदाबाद में  कहा कि अगर वह तानाशाह होते तो देश के स्कूलों में पहली से ही महाभारत पढ़वाते! इस महाकाव्य का एक सार यह है कि जुआ एक बड़ी बुराई है और ऋगवेद और मनुस्मृति में भी इस सत्य को स्वीकार किया गया है। प्राचीन काल में कानून निर्माता यह चाहते थे कि राजा जुए आदि पर प्रतिबंध लगाएं। हालांकि आधुनिक राज्यों ने सदियों के अपने अनुभवों से यह सीखा है कि जुए में आसानी से कुछ हासिल करने की इस मानवीय कमजोरी पर रोक लगाने से शराब, सट्टा और माफिया जैसी गोपनीय गैरकानूनी गतिविधियों की तरह इसे भी बढ़ावा मिलेगा। कई देशों ने नशीले पदार्थों पर रोक लगाने की असंभव कोशिश के बाद आजिज आकर हाल ही में इनके कारोबार को कानूनी अमलीजामा पहनाया है।

भारत में लॉटरी का कुल बाजार (जिसमें ऑनलाइन लॉटरी भी शामिल है) अनुमानत: 60 अरब डॉलर से भी ज्यादा है। हालांकि इस क्षेत्र के आंकड़े भी किसी जुए से कम नहीं हैं। इसके कारोबार को अनिच्छापूर्वक ही सही व्यापार विषय के तौर पर मान्यता दी जाती है और यह संविधान की संघीय सूची में केंद्र के लिए आरक्षित किया गया है। दिलचस्प बात है कि सट्टेबाजी और जुआ राज्य के विषय हैं। ये सभी कारोबार जो नैतिकता की कीमत पर फल-फूल रहे हैं वे किसी राज्य के लिए राजस्व के एक बड़े स्रोत हैं क्योंकि उन पर कर लगाया जा सकता है। हालांकि वे संविधान की मूल भावना के खिलाफ भी जाते हैं लेकिन सरकारें तो संभावनाओं की बुनियाद पर चलाई जाती हैं।

राज्यों द्वारा चलाई जा रही लॉटरियों को लेकर कई याचिकाएं दर्ज की गई हैं और हाल के हफ्तों में उच्चतम न्यायालय ने राज्यों के बीच लॉटरियों को लेकर मतभेद जैसी स्थिति खत्म करने के लिए दर्जनों आदेश पारित किए हैं। हर राज्य अपनी लॉटरी से पूरा राजस्व हासिल करना चाहता है और राज्य की यह भी कोशिश होती है कि उसके क्षेत्र में दूसरों का दखल न हो। लेकिन देश ने संघीय संविधान को अपनाया है और संविधान के अनुच्छेद 301 के तहत देश में व्यापार की स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। राज्य की सीमाओं से पार लॉटरियों से जुड़े बढ़ते विवादों और मुकदमेबाजी की वजह से केंद्र ने 1998 में लॉटरी विनियमन अधिनियम बनाया।

इसके तहत राज्य सरकारों को यह अनुमति दी गई कि वे दूसरे राज्यों की लॉटरियों पर प्रतिबंध लगा सकते हैं लेकिन इसे एजेंटों और कुछ राज्यों ने तुरंत चुनौती दे दी। उच्चतम न्यायालय ने बी आर एंटरप्राइजेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1999) मामले में दिए गए अपने फैसले में इस कानून को सही ठहराया लेकिन कुछ प्रावधान भी स्पष्ट कर दिए। अदालत ने कहा कि केवल वे राज्य जो लॉटरी का संचालन नहीं करते हैं वे दूसरे राज्यों की लॉटरियों पर रोक लगा सकते हैं। अदालत ने कहा कि यह कारोबार शराब बेचने की तरह ही 'सहज रूप से बुरा और हानिकारक हैं जिसकी निंदा सभी नागरिक समाज करते हैं।'

अब तक लॉटरियों को लेकर झगड़ा खत्म नहीं हुआ है। उच्चतम न्यायालय को इस कानून से जुड़े कुछ सवालों को अभी तय करना है। राज्य एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी अड़चन बढ़ाना जारी रखे हुए हैं। सिक्किम ने भी वर्ष 2002 में पंजाब सरकार के खिलाफ अदालत में गुहार लगाई जिसने इस पर्वतीय राज्य की ऑनलाइन लॉटरी को बंद करने की कोशिश की थी। इसके अलावा इसने पंजाब लॉटरी नियमों की वैधता को चुनौती दी थी। लेकिन  पिछले पखवाड़े कुछ परिस्थितियां बदली हैं और सिक्किम ने अपनी याचिका वापस ले ली। अदालत ने कहा है कि अगर पंजाब सिक्किम की ऑनलाइन लॉटरी को रोकता है तो सिक्किम फिर से अदालत की शरण में आ सकता है। वर्ष 2003 में नगालैंड ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ एक याचिका दायर की थी जिसे पिछले पखवाड़े वापस ले लिया गया।

देश में केरल पहला ऐसा राज्य था जिसने अपना राजस्व बढ़ाने के लिए 1967 में अपनी लॉटरी शुरू की थी और उसी वक्त से वह वादी की भूमिका में आ गया। इस राज्य में शराब के ठेके के नीचे लॉटरी को स्थान दिया गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि लॉटरी परोपकारी गतिविधियों की आड़ में चलाई जाती है। सभी सत्तारूढ़ दलों ने राज्यों को लॉटरी के व्यापार में प्रवेश करने से रोका है और रोक का उल्लंघन करने वाली वितरण एजेंसियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। अपने हालिया आदेशों में उच्चतम न्यायालय ने इस बात को रेखांकित किया कि केंद्रीय कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं हैं इस वजह से जब तक ये मुख्य मामले न निपटा लिए जाएं तब तक केरल में एजेंटों के खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को निलंबित करना पड़ेगा। निश्चित तौर पर अदालत में कई पुराने मामलों को देखते हुए इसमें कुछ वक्त लगेगा। बेशक इस राज्य में परस्पर विरोधी मोर्चों के बीच लॉटरी एक दूसरा राजनीतिक मामला बन गया है।

एक अन्य मामले में दूसरे राज्यों की ऑनलाइन लॉटरियों पर कर्नाटक के प्रतिबंध को सिक्किम सरकार ने चुनौती दी थी। हालांकि कर्नाटक सरकार ने अदालत से कहा था कि यह एक 'लॉटरी मुक्त राज्य' है इसलिए इस मुद्दे पर व्यथित होने की जरूरत नहीं है। अगर सरकार अपनी नीतियों को बदलती है तो सिक्किम को अदालत जाने की अनुमति दी गई है। इसी तरह पंजाब के एक मामले में याचियों को उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश दिया गया। हालांकि सभी अवमानना याचिकाओं और दूसरी अर्जियों को निपटा दिया गया, हालांकि मुख्य याचिका में उठाए गए मुद्दे का कोई निपटारा नहीं हुआ है। भूटान अपनी एक पनबिजली परियोजना के लिए पैसे जुटाने के लिए भारत में लॉटरी की बिक्री से पूंजी जुटाना चाहता था लेकिन फिर वह पीछे हट गया। इस तरह लॉटरी युद्ध से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय कोण की संभावना कम हो गई। हालांकि वर्तमान में कानूनों के जरिये केवल सरकारी लॉटरियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। आजकल देश राज्य की सीमाओं से इतर भी कई तरह के जुआ हैं जो ऑनलाइन मौजूद हैं।

Keyword: supreme court, justice,,
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