बंबई उच्च न्यायालय ने विवादास्पद बाल दीक्षा मुद्दे पर विभिन्न याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के लिए आज एक अगस्त की तारीख तय की। मार्च, 2004 में आठ साल की एक लड़की के बाल दीक्षा ग्रहण करने के बाद यह विषय चर्चा में आया था।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष यह मामला आया और पीठ ने अंतिम सुनवाई के लिए एक अगस्त की तारीख तय की।
याचिकाकर्ता अशोक बगरीचा तथा अन्य का कहना था कि बाल दीक्षा ऐसी प्रथा है जो जैनधर्म का अभिन्न अंग है। उन्होंने बाल कल्याण समिति :सीडब्ल्यूसी: के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी जिसने कहा था कि दीक्षा का मार्ग चुनने वाली इस छोटी बच्ची का देखभाल किए जाने की आवश्यकता है।
मार्च, 2004 में दीक्षा समारोह में एक नाबालिग बच्ची के भौतिक संसार का परित्याग करने की घोषणा से बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच इस प्रथा को लेकर चर्चा छिड़ गयी थी। एक गैर सरकारी संगठन चाइल्डलाइन ने सीडब्ल्यूसी का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।
जारी भाषा
07042016 दि
नननन