उच्चतम न्यायालय ने गंदे माहौल में नसबंदी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर केंद्र और प्रदेश सरकारों से जवाब मांगा है ।
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि देश भर में महिलाओं के लिए नसबंदी शिविर गंदे माहौल में चलाए जा रहे हैं ।
न्यायमूर्ति आर एम लोढा और न्यायमूर्ति ए आर दवे ने स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ता देविका बिस्वास की याचिका पर संबंधित अधिकारियों के जवाब देने में नाकाम रहने पर मामले की सुनवाई 12 हफ्ते के लिए टाल दी ।
अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि बिहार जैसी जगहों में नसबंदी शिविर टार्च की रोशनी में आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें अप्रशिक्षित एनजीओ कार्यकर्ता एनस्थीसिया का प्रयोग कर रहे हैं ।
याचिका में कहा गया कि इस बात के सुबूत हैं कि बिहार सरकार से करार वाले एक एनजीओ ने एक घंटे में 60 ऑपरेशन कर डाले ।