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क्या है आंकड़ों के पीछे का सच?
आशिष पई /  November 17, 2013

अगर आप कंपनी के परिणामों के आंकड़ों पर ही केवल निगाह डाल रहे हैं तो दोबारा विचार करने की जरूरत है। कोई कंपनी अंकेक्षण विधि में बदलाव के बाद अपनी आय के आंकड़े पेश करती है तो वे वास्तविक मुनाफा नहीं दर्शाते हैं। कोई भी आखिरी फैसला करने से पहले कंपनियों के परिणामों की विवेचना विस्तार से करने की दरकार होती है। कई बार निवेशक अंकेक्षण नीति में छोटे बदलाव को नजरअंदाज करते हैं। निर्णय लेने से पहले निम्रलिखित पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है:

'अन्य आय' इजाफा

'अन्य आयÓ के तहत प्राप्त आय की पुनरावृत्ति दोबारा नहीं होती है और यह परिसंपत्तियों, जायदाद की बिक्री से हासिल होती हैं। यह कंपनी की मुख्य आय का हिस्सा नहीं होती है और यह कुल आय के आंकड़े में इजाफा कर सकती है। फार्मा कंपनी फाइजर और पीरामल हेल्थकेयर ने 'अन्य आयÓ के तहत अधिक आंकड़े दिखाए थे, क्योंकि उन्होंने अपने फार्मा डिविजन का एक हिस्सा बेचा था। कुछ कंपनियों ने अपने ब्रांड दूसरे कंपनियों को बेच दिए थे।

अंकेक्षण नीतियों में बदलाव
वैकल्पिक अंकेक्षण नीतियां अपनाकर आय और परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी को अंजाम दिया जा सकता है। आय बढ़ाने या व्यय कम करने के लिए कंपनियां समय-समय पर नई अंकेक्षण नीतियों का सहारा लेती हैं। मुनाफा बढ़ाने के लिए आम तौर पर डेप्रिसिएशन पॉलिसी में बदलाव किया जाता है। मिसाल के तौर पर एक अग्रणी टायर निर्माता कंपनी ने रबर पर बढ़ी लागत से निपटने के लिए अपनी 2010-2011 में डेप्रिसिएशन पॉलिसी रिटेन-डाउन वैल्यू (डब्ल्यूडीवी) से बदलकर स्ट्रेट-लाइन मेथड (एसएलएम) कर दी थी। इसी तरह, गो एयर ने 2012-13 में लीज रेंटल के अंकेक्षण में बदलाव कर अधिक मुनाफा पेश किया था। वित्त वर्ष 2011-12 तक गो एयर ने अपनी सभी पूरक लीज रेंट को व्यय के तौर पर पेश कया था। लेकिन वित्त वर्ष 20912-13 तक प्रबंधन ने नीति में बदलाव किया और केवल नॉन-रिकवरेवल लीज रेंट को ही व्यय के तौर पर दिखाया।

अधिक विदेशी विनिमय या डेट में निवेश
वॉकहार्ट और सुजलॉन जैसी कंपनियों को उनके विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) की वजह से खासे नुकसान का सामना करना पड़ा है। हमेशा उस कंपनी में निवेश करना चाहिए जिनका डेट में अधिक निवेश नहीं है।

राउंड ट्रिपिंग
अक्सर अधिक राजस्व दिखाने के लिए कंपनियां संबंधित पक्षों के साथ नकली परिचालन करती हैं। राउंड ट्रिपिंग के तहत कंपनी दूसरे पक्ष को इस वादे के साथ इस्तेमाल नहीं हुई परिसंपत्तियां बेचती है कि वह बाद में समान कीमत पर इन्हें खरीद लेगी। मझोली कंपनियों के साथ यह बात देखने को मिलती है। कर से बचने के लिए ऐपल ने भी अपनी सहायक कंपनियों का इस्तेमाल किया था।
गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां
वित्तीय समीक्षा की दृष्टिï से बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का प्रतिशत खासा महत्त्वपूर्ण होता है। किसी बैंक ने भले ही कम मुनाफा दिखाया हो लेकिन उसके एनपीए के आंकड़ों में सुधार होता है तो इसके शेयरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। भारतीय स्टेट बैंक वित्त वर्ष 2012-14 में काफी कम मुनाफा दिखाया था, लेकिन एनपीए में सुधार से इसके शेयरों  में अधिक गिरावट नहीं देखी गई।

सुधार के उपाय
आम तौर पर आईएफआरएस रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी और मानक होता है लेकिन भारत में यह अनिवार्य नहीं है। ऐसे समय में जब कंपनियां वैश्विक पटल पर छा रही हैं, आईएफआरएस की अधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है। अनिश्चितता के समय नए तरीके अपनाने के बजाय अंकक्षण विधि स्थिर रहनी चाहिए। भारती एयरटेल, इन्फोसिस, विप्रो और माइंडट्री कुछ ऐसी भारतीय कंपनियां हैं जो स्वैच्छिक रूप से आईएफआरएस स्टैंडड्र्स का अनुपालन करती हैं।

जो कंपनियां विभिन्न देशों में काम करती हैं या विदेश में रकम जुटाना चाहती हैं उनके लिए आईएफआरएस अधिक उपयोगी होती है। कभी-कभी कंपनियां अधिक मुनाफा दर्शाती हैं, लेकिन नकदी प्रवाह एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा होता है। अगर कंपनी नकदी की कमी का सामना कर रही है तो यह उसके कैश-फ्लो पोजीशन में नजर आता है। एक दूसरा पहलू बिक्री में बढ़ोतरी का है।

मिसाल के तौर पर वाहन उद्योग संघ नियमित अंतराल पर बिक्री के आंकड़े पेश करता है। इन आंकड़ों से यह पता लगाया जा सकता है कि बिक्री उद्योग की अपेक्षाओं से अधिक या कम रही है। एक दूसरा मानक वित्तीय अनुपात होते हैं। अगर कंपनी के अनुपात इसके प्रतिस्पद्र्धियों से मेल नहीं खाते हैं तो इसकी अंकेक्षण विधि की जांच सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हो जाता है। वित्तीय अनुपात में असमानता बढ़ी हुई आय, परिसंपत्ति मूल्यांकन या व्यय और देनदारियों के गलत आंकड़ों की वजह से हो सकता है।

सत्यम और एनएसईएल जैसी घटनाओं के बाद निवेशकों को सावधान रहने और वित्तीय परिणामों से इतर सोचने की जरूरत है।  

लेखक स्वतंत्र लेखन करते हैं।

Keyword: Deta, कंपनी अंकेक्षण विधि, Income, Profit, Loss,
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