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क्या बाजार से एफआईआई का मोहभंग हो गया है
पुनीत वाधवा /  11 13, 2013

सितंबर से तरलता-आधारित तेजी ने भारतीय शेयर बाजारों को लगभग 6 साल बाद नई ऊंचाई छूने के लिए प्रोत्साहित किया और बीएसई के सेंसेक्स ने ऊंचाई का नया स्तर बनाया। हालांकि भले ही इससे बाजार को लेकर निवेशकों के बीच उत्साह पैदा हुआ और यह धारणा प्रबल हुई कि  एफआईआई भारत को लेकर विश्वस्त हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अभी भी यह रुझान बरकरार है?

यदि आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अलग तस्वीर का पता चलता है। जहां एफआईआई ने 2013 में भारतीय बाजारों में अब तक लगभग 16.6 अरब डॉलर का निवेश किया है। ऐम्बिट इन्वेस्टमेंट एडवायजर्स के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, 'जब एफआईआई ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम में कटौती को देखते हुए भारत के बजाय अधिक आकर्षक निवेश स्थलों की तरफ दिलचस्पी ली तो मई और अगस्त के बीच हमारे बाजारों में एफआईआई निवेश काफी घट गया था।Ó

प्रतिस्पर्धियों पर असर
भारत के अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों में शामिल थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया और श्रीलंका में पिछले साल के मुकाबले बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा। ऐस्पिरिटो सैंटो सिक्योरिटीज के कंट्री हेड (भारत) निक पॉलसन-एलिस ने कहा, 'उभरते बाजारों (ईएम) में सुस्ती बनी हुई है और अब वहां जीडीपी वृद्घि अब चार वर्ष के निचले स्तर पर है। इन सभी देशों ने पिछले दशक के दौरान निजी क्षेत्र के कर्ज स्तर में अच्छी तेजी दर्ज की और इसलिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व से तरलता वापसी का खतरा यह चिंता पैदा कर रहा है कि इससे उनकी कमजोरियों का खुलासा होगा, और यदि यह संकट का कारण नहीं भी बनता है तो इससे कम से कम वृद्घि की रफ्तार कई वर्षों के लिए सुस्त पड़ जाएगी।Ó

दूसरी तरफ एशियाई क्षेत्र में जापान पसंदीदा देश है जिसने इस साल अब तक 105 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आकर्षित किया जो पिछले साल के मुकाबले 2,507 फीसदी की शानदार वृद्घि है। वियतनाम, ताईवान, पाकिस्तान और अबू धाबी ऐसे कुछ अन्य क्षेत्र हैं जिन्होंने 2013 में अधिक पूंजी प्रवाह आकर्षित किया।
निक पॉलसन-एलिस ने कहा, 'निवेशकों की 'एमएससीआई फ्रंटियर मार्केट्ïर्सÓ के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और कतर सभी लाभान्वित हुए हैं। इन बाजारों का प्रदर्शन इस साल उभरते बाजारों की तुलना में बेहतर रहा है और उभरते बाजारों के लिए 5 फीसदी की गिरावट की तुलना में इनमें 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।Ó
आगे की राह
उभरते बाजारों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है और अमेरिकी फेडरल के बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम के संदर्भ में फैसले को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या अगले एक साल के दौरान उभरते बाजारों के लिए नकदी में कमी आएगी? जहां तक भारत का सवाल है तो उसे अपनी आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है और वह चुनावी तैयारियों में भी लगा हुआ है।

हॉलैंड का मानना है, 'मैं नहीं मानता कि उभरते बाजारों (भारत भी शामिल) के लिए एफआईआई की दिलचस्पी समाप्त हो गई है। मेा मानना है कि तस्वीर सकारात्मक बनी रहेगी, क्योंकि आर्थिक वृद्घि की रफ्तार में अगले साल तेजी आने की संभावना है। अगले एक साल के दौरान भारतीय बाजारों में उचित मात्रा में पूंजी प्रवाह बना रहेगा और मुझे उम्मीद है कि दूसरी छमाही में मजबूती के साथ अगले वर्ष यह 25 अरब डॉलर के दायरे में होगा।Ó

हॉलैंड का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की योजनाओं को देखते हुए अल्पावधि में उभरते बाजार दबाव में रहेंगे और अगले 6 महीने इक्विटी बाजारों के लिए मुश्किल अवधि वाले रह सकते हैं। जहां तक भारत का सवाल है, यदि वहां दोहरे घाटे (राजकोषीय और चालू खाते) और मुद्रास्फीति के संदर्भ में नकारात्मक बदलाव आता है तो इससे दबाव पड़ सकता है। वह कहते हैं, 'भारतीय बाजार के लिए मूल्यांकन उसके ऐतिहासिक औसत के नजदीक है और प्रमुख बाजार सस्ता दिख रहा है।Ó बीएनपी पारिबा इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स के मुख्य कार्याधिकारी (एशिया प्रशांत) विंसेंट कैमरलिंक का मानना है, 'उभरते बाजारों में भारत और चीन दोनों ही विभिन्न वजहों से अहम हैं।

बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी निखिल जौहरी का कहना है, 'चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन मैं यह कहना नहीं चाहूंगा कि बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा जनमत सर्वेक्षणों पर केंद्रित होने और किसी एक पार्टी के विजयी होकर उभरने की उम्मीद से बाजार में बड़ी तेजी आई है। बाजार को उम्मीद है कि बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार, खासकर खाद्य आपूर्ति चेन में समस्याओं को दूर किए जाने आदि से ब्याज दर नीचे लाने में मदद मिलेगी।Ó

मॉर्गन स्टैनली के जोनाथन एफ गार्नर ने अपनी एशिया स्टे्रटेजी रिपोर्ट में कहा, 'हम जापान को लगातार तरजीह दे रहे हैं। फंडिंग में अंतर, नकारात्मक आय संशोधनों और ढांचागत सुधार को लेक

शेयर बाजार में गिरावट से कारोबारी चकित

इस महीने शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने उन कई व्यापारियों को आश्चर्यचकित कर दिया है जो बाजार के सर्वाधिक ऊंचाई के नजदीक पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

डेरिवेटिव विश्लेषकों ने कहा कि कई संपन्न निवेशक (एचएनआई) और छोटे कारोबारी इसे लेकर उत्साहित थे कि 3 नवंबर को रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद निफ्टी फिर से नई ऊंचाई की ओर बढ़ेगा। बाजार धारणा में तेजी की स्थिति के बजाय मौजूदा रुझान ने कारोबारियों को बड़े नुकसन के साथ अपनी पोजीशन निपटाने के लिए बाध्य कर दिया है। निफ्टी आज लगातार सातवें दिन गिर कर 6000 से नीचे बंद हुआ। 50 शेयरों वाला यह सूचकांक 3 नवंबर को मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान छुए गए 6300 के स्तर से 300 अंक कमजोर हो चुका है। एक घरेलू ब्रोकरेज के डेरिवेटिव विश्लेषक ने पहचान गुप्त रखने के अनुरोध पर बताया, 'बाजार में सर्वाधिक ऊंचे स्तर से अचानक गिरावट ने कई कारोबारियों को आश्चर्यचकित कर दिया है।

इनमें से ज्यादातर कारोबार इस अचानक बदलाव को लेकर यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि क्या उन्हें महीने के शुरू में बनाई गई लॉन्ग पोजीशन का निपटान कर देना चाहिए या नहीं।Ó खासकर छोटे कारोबार इस दुविधा का अधिक शिकार हुए हैं, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अपनी पोजीशन को हलका करना शुरू कर दिया था।

एडलवाइस फाइनैंशियल सिक्योरिटीज के प्रमुख (क्वांटीटेटिव रिसर्च) योगेश राडके ने कहा, 'बाजार द्वारा नई सर्वाधिक ऊंचाई को छुए जाने के बाद बाजार को लेकर उत्साहित कुछ खास खुदरा निवेशक या एचएनआई गिरावट में फंस गए। हालांकि एफआईआई मजबूत स्थिति मे हैं और दीर्घावधि के लिए अधिक आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं।Ó

जानकारों का कहना है कि ज्यादातर कारोबारियों ने मजबूत सकारात्मक रुझान को देखते हुए पिछली सीरीज से अपनी लॉन्ग पोजीशन को रोल ओवर किया था। लेकिन खासकर एफआईआई ने 3 नवंबर के बाद से ही अपनी पोजीशन को हलका बनाना शुरू कर दिया था।  राडके ने कहा, '3 नवंबर को बाजार द्वारा उच्च स्तर को छुए जाने के बाद से ओपन इंटरेस्ट में बदलाव ने लॉन्ग पोजीशन में कमी की है और शॉर्ट पोजीशन में इजाफा किया है।Ó

बाजार पंडितों ने शेयर बाजार में आई ताजा गिरावट के लिए भारतीय बाजार में ईटीएफ प्रवाह में कमी को जिम्मेदार बताया है। बाजार रुझान को लेकर विश्लेषकों की अलग अलग राय है। कुछ का मानना है कि गिरावट की वजह से इसमें तेजी आएगी जबकि कुछ का मानना है कि बाजार और गिर सकता है।

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