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निवेशकों के लिए वैकल्पिक निवेश का रास्ता
योगिनी जोगलेकर /  November 04, 2013

रियल एस्टेट निवेशकों को इस सेक्टर में निवेश के लिए एक अन्य विकल्प रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्ïस (रीट्ïस) उपलब्ध होगा। हालांकि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) वर्ष 2008 में ही इस योजना को लॉन्च करने की योजना बना रहा था, लेकिन पब्लिक फीडबैक के लिए परामर्श पत्र के साथ इसे पिछले गुरुवार को ही अंतिम रूप दिया गया है।

इस उद्योग की कंपनियों का कहना है कि यदि सभी शर्तों को स्वीकार किया जाता है तो पारदर्शिता, विविधीकरण, प्रतिफल और तरलता जैसे विभिन्न मानकों पर इस योजना के काफी हद तक लोकप्रिय होने की संभावना है। दो लाख रुपये की प्रवेश शर्त भी एसएमई एक्सचेंज में न्यूनतम निवेश के लिए एक लाख रुपये की सीमा से अधिक है। इस पहल से यह भी सुनिश्चित होगा कि कई छोटे निवेशक इस योजना में शामिल नहीं होंगे। इस संबंध में पारदर्शिता बेहद अहम है। बाजार नियामक ने इन निवेश योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर दिया है।

इसके लिए 90 प्रतिशत रकम राजस्व अर्जित करने वाली परियोजनाओं में निवेश की जाएगी। इसके अलावा पूरी रकम तब तक किसी एक परियोजना में निवेश नहीं की जाएगी जब तक कि यह 1000 करोड़ रुपये से कम की हो। विश्लेषकों का कहना है कि इन दो शर्तों ने यह सुनिश्चित किया है कि निवेशक ऐसी निर्माणाधीन परिसंपत्ति में निवेश के लिए बाध्य नहीं होंगे जो सिर्फ कुछ वर्ष बाद ही प्रतिफल देना शुरू करेंगी।

मूल्यांकन मानक भी सख्त हैं। साल में कम से कम एक बार इन परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा और प्रत्येक 6 महीने पर इसमें संशोधन किया जाएगा। इसी के अनुसार रीट की एनएवी साल में दो बार घोषित की जाएगी। सेबी इस मामले में आगे आया और उसने यह सख्त क्लॉज रखा कि रीट 110 प्रतिशत से अधिक भुगतान नहीं कर सकती या परिसंपत्ति की कीमत के 90 प्रतिशत से कम पर इसे नहीं बेचा जा सकेगा।

बाजार दिग्गजों के अनुसार प्रतिफल को लेकर समस्या हो सकती है। वाणिज्यिक परिसंपत्तियों की 6-7 फीसदी किराया आय को देखते हुए निवेशक अधिक उत्साहित नहीं भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, अल्पावधि गिल्ट फंडों ने पिछले साल 9.5 फीसदी का प्रतिफल दिया। जोंस लांग लसॉल-इंडिया के शोध प्रमुख आशुतोष लिमये कहते हैं, 'अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में रीट का प्रतिफल 6-7 फीसदी के आसपास है जो वहां कम ब्याज दरों की वजह से काफी आकर्षक है।Ó

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि संपत्ति विश्लेषक इस उत्पाद को लेकर उत्साहित हैं, क्योंकि यह उत्पाद उन बिल्डरों के लिए निवेशक तलाशने में मददगार साबित हो सकता है जिन्हें नकदी की किल्लत का सामना करना पड़     रहा है।

जानकारों का कहना है कि म्युचुअल फंड के पोर्टफोलियो की तरह उन्हें ट्रस्टों द्वारा खरीदी जाने वाली परिसंपत्तियों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। आरबीएस फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (रियल एस्टेट सर्विस) आनंद मूर्ति ने कहा, 'इसके लिए परिसंपत्तियों की गुणवत्ता, किराएदार, किराया आय और पूंजी वैल्यू पर ध्यान दिया जाना चाहिए।Ó

चूंकि वाणिज्यिक परिसंपत्तियों का किराया उसके अनुबंध के शुरू में दो-तीन वर्षों की अवधि के हिसाब से तय होता है, इसलिए किराया प्रतिफल इस अवधि के लिए नहीं बदलेगा। विश्लेषकों का कहना है कि रीट्ïस यदि विषय-केंद्रित हो तो यह सफल हो सकती है। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन, फ्रांस और सिंगापुर जैसे विकसित बाजारों में, जहां मॉल या गोदाम-केंद्रित रीट्ïस निवेशकों के लिए अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। 

यह उत्पाद म्युचुअल फंडों और ब्रोकरों द्वारा पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि अभी इसे लेकर स्थिति स्पष्टï नहीं है कि यह उत्पाद कर से जुड़ा होगा या नहीं। विश्लेषकों का कहना है कि वे सेबी से इस बारे में स्पष्टïीकरण चाहते हैं कि कर के संबंध में इस उत्पाद को किस तरह की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

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