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निवेश के नए साधन, अस्पताल, स्कूल और एटीएम
योगिनी जोगलेकर /  October 16, 2013

हाल में ही एक विदेशी बैंक ने मुंबई के एक धनाढ्य व्यक्ति (एचएनआई) के लिए एक सौदा पूरा किया। इस व्यक्ति ने पुणे के वकाड में एक स्कूल खरीदा था। विनिर्माता ने यह स्कूल दो एकड़ भूमि में बनाया था, जिसके बाद इसके प्रबंधन ने निवेशकों की तलाश शुरू कर दी। एचएनआई ने 20-25 करोड़ रुपये निवेश किया था और वह 10 प्रतिशत प्रतिफल अर्जित कर रहा है।

इस निवेश के लिए करोड़ों रुपये की जरू रत थी। एक बात याद रखनी जरूरी है कि सभी निवेश एक समान नहीं होते हैं, क्योंकि खर्च जायदाद के प्रकार, शहर और स्थान पर निर्भर करते हैं।

उन क्षेत्रों में सामाजिक अधोसंरचना जायदाद की खासी मांग होती है, जहां विनिर्माता टाउनशिप का निर्माण करते हैं। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंधक (दक्षिण एशिया) संजय दत्त कहते हैं, 'अगर व्यावसायिक जायदाद टियर 2 और टियर 3 शहर में तो निवेश की रकम समान ही होगी।Ó

रियल एस्टेट में निवेश लोग अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए करते हैं। इन दिनों सभी जायदाद की कीमतों में गिरावट आ रही है, जिसे देखते हुए निवेशक विविधता लाने के लिए अपने रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में दूसरे विक ल्पों की तलाश कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जिन एचएनआई ने 2 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है, उन्हें प्रतिफल नहीं मिला है। पांच साल में भी उनका निवेश दोगुना नहीं हुआ है।

आवासीय परिसंपत्तियों में निवेश अब उतना आकर्षक नहीं रह गया है। इसके मद्देनजर लोग व्यावसायिक परिसंपत्तियों में ऑफिस स्पेस से इतर निवेश के विकल्प की तलाश में जुट गए हैं। इनमें ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम), वेयरहाउस, औद्योगिक भूखंड, निजी स्कूल, अस्पताल आदि शामिल हैं। स्कूल और अस्पताल भी सामाजिक अधोसंरचना के तहत ही आते हैं। आरबीएस फाइनैंशियल सर्विसेस इंडिया के प्रमुख (रियल एस्टेट सर्विसेस) आनंद मूर्ति कहते हैं, 'किरायेदार जायदाद में लंबी अवधि के लिए दिलचस्पी रखते हैं। अधिक पूंजी और बौद्धिक निवेश के कारण लॉक- इन पीरियड अधिक होती है।Ó

व्यावसायिक खंड में अत्यधिक आपूर्ति के साथ ही बदलावा होना शुरू हो गया। 2008-09 के मुकाबले यह खंड इस समय 40-50 प्रतिशत तक नीचे चल रहा है। इसके बाद किराये से प्राप्त होने वाली रकम में भी कमी आनी शुरू हो गई और इस समय प्राप्तियां अब तक के निचले स्तर पर पहुंच गई है। स्कूल और अस्पताल में निवेश के लिए एचएनआई विनिर्माता से जायदाद खरीदते हैं और एक समझौता करते हैं, जिसके तहत उन्हें हरेक महीने निश्चित किराया मिलने की गारंटी दी जाती है। स्कूल की बात करें तो किराया हरेक साल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर निर्भर करता है। जहां तक अस्पताल की बात है, किराया बिस्तर (बेड) की संख्या पर निर्भर करता है। प्रबंधन किराये के लिए जवाबदेह होगा, यह उनके खाते में परिचालन लागत का हिस्सा होगा। ऐसे निवेश के लिए ज्यादातर एचएनआई टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। टियर-1 और टियर-2 शहरों में एटीएम, वेयरहाउस और हाई-स्ट्रीट शॉप की मांग अधिक होती है।

ऐसे जायदाद के लिए लॉक-इन पीरियड सामान्य तौर पर कार्यालय के लिए निर्धारित स्थानों से अधिक होती है। कोई निवेशक लॉक इन पीरियड से अधिक समय के लिए निवेश बनाए रखना चाहेगा। एटीएम और वेयरहाउस के लिए यह अवधि 3-5 साल होती है, जबकि अस्पताल और स्कूल के लिए यह 8-10 साल तक हो सकती है।
ऐसे लोग जिनकी नजर लंबी लॉक-इन अवधि पर है और पहले दिन से अपनी पूंजी पर प्रतिफल की अपेक्षा रखते हैं, उनके लिए निवेश के ये विकल्प अधिक कारगर हैं। साथ ही ये ऐसे लोगों के लिए भी है, जो कोई जोखिम लिए बिना नियमित आय की इच्छा रखते हैं। कार्यालय के लिए जगह की बात करें तो सालाना अनुबंध समाप्त होने के बाद किरायेदार खोजने में दिक्कतें आती हैं।

प्रतिफल, जिस परिसंपत्ति में निवेश होता है या जिस क्षेत्र में जायदाद खरीदी जाती है, उस पर निर्भर करता है। इस खंड का अभी माननकीकरण नहीं हुआ है और स्थापित प्रतिफल भी प्राप्त नहीं होता है। आरबीएस के मूर्ति कहते हैं, 'ऑफिस प्रॉपर्टी के मुकाबले स्कूल, अस्पताल और वेयरहाउस के स्थानांतरित होने की संभावना कम होती है। इसके साथ ही किराया बढऩे का भी आश्वासन होता है।Ó

टियर-2 सिटी में स्कूल/अस्पताल से प्राप्त होने वाला प्रतिफल टियर-3 सिटी से भिन्न होगा। नाइट फै्रंक के क्षेत्रीय प्रमुख (उत्तर) मुदस्सिर जैदी कहते हैं, 'आम तौर पर बैंक एटीएम 10-14 प्रतिशत प्रतिफल देते हैं। एक ही क्षेत्र में दो अलग-अलग बैंकों के एटीएम भिन्न प्रतिफल दे सकते हैं।Ó जैदी कहते हैं कि विदेशी या निजी बैंक एटीएम से प्राप्त किराया सहकारी बैंक एटीएम से प्राप्त किराये से अलग हो सकता है।

इस खंड में निवेश के लिए कम से कम 1 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। मिसाल के तौर पर आप बांद्रा (मुंबई) में एटीएम के लिए जगह 80 लाख रुपये में खरीद सकते हैं, जबकि कुछेक करोड़ रुपये में आप टियर-2/3 सिटी में छोटा शिक्षण संस्थान/स्कूल खरीद सकते हैं। वेयरहाउस की कीमत 50 लाख रुपये से शुरू होती है। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के संजय दत्त कहते हैं, 'इन जायदाद में निवेश के कुछ गुण-दोष हाते हैं। पहली बात तो यह कि  निर्माण से संबंधित कोई जोखिम नहीं होता है, क्योंकि ज्यादातर आप तैयार जायदाद खरीदते हैं। लिहाजा नियामकीय अनुमति प्राप्त करने में समय जाया नहीं होती है। अस्पताल या स्कूल के लिए कृषि योग्य भूमि का इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान होता है।Ó

चूंकि, इनमें निवेश अधिक करना होता है, इसलिए सावधान रहने की भी जरूरत है। सामान्य तौर पर एचएनआई इन जायदाद को देखने के लिए नियमित तौर पर नहीं आते हैं। लेकिन स्कूल/अस्पताल कैसे काम कर रहा है, इस पर जरूर नजर रखना चाहिए। इसके अलावा कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत है। एक व्यापक समझौता तैयार करना चाहिए और इस पर कानूनी सलाहकार और प्रॉपर्टी कंसल्टैंट की राय जरूर लेनी चाहिए। समझौते में लॉक-इन-पीरियड का घाल-मेल अवधि से न करें।

लॉक-इन-पीरियड में आपको एक निश्चित समय तक के लिए निवेश बनाए रखना होगा, जबकि अवधि वह होती है जितने समय तक के लिए आपने निवेश बनाए रखने का फैसला किया है। मूर्ति कहते हैं, 'पंूजी की गणना के लिए प्राप्त किराये में जायदाद कर और सेवा कर और कॉमन एरिया एक्सपेंस घटाना चाहिए। वास्तविक प्रतिफल की गणना के लिए स्टांप ड्यूटी और ब्रोकरेज खर्च पर भी विचार करना चाहिए। इसके साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट और हरेक साल किराया कितना बढ़ेगा, इसकी भी पुष्टिï कर लें।Ó

Keyword: NHI, योगिनी जोगलेकर, School, Hospital, लॉक-इन-पीरियड,
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