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निफ्टी पहुंचेगा 7,000 तक!
समी मोडक /  September 29, 2013

इस साल चार दफा कोशिशों के बावजूद मजबूत तकनीकी प्रतिरोध के कारण भारतीय बाजार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाया है। एनएसई निफ्टी को 6,100-6200 के करीब मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस साल निफ्टी इस स्तर से चार बार नीचे की ओर गया और 5 नवंबर 2010 को जब इसने 6,312 के स्तर को छू लिया था उस वक्त से यह कई दफा इस स्तर से नीचे की ओर जा चुका है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि जब भी निफ्टी 6,100 के स्तर से ऊपर की ओर जाता है कारोबारी मुनाफा बुक करने के लिए होड़ लगा देते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का भरोसा ही नहीं होता है कि बाजार इस स्तर पर लंबे समय तक बना रहेगा।

मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (तकनीकी इक्वटी) शुभम अग्रवाल का कहना है, 'बार-बार यह देखा गया है कि 6,100-6,200 का दायरा निफ्टी के लिए मजबूत प्रतिरोध साबित हो रहा है। हर वक्त खरीदारी से ज्यादा बिकवाली की जाती है क्योंकि कारोबारी हर वक्त मुनाफा बुक करने की फिराक में रहते हैं।Ó

बढ़त के आसार भी
आईआर्ईएफएल के वरिष्ठ शोध विश्लेषक हेमंत नाहटा का कहना है, '6,100 के स्तर पर जोखिम प्रोत्साहन अनुपात धीरे-धीरे कम होता है। कारोबारी यह देखने के लिए बिकवाली करते हैं कि निफ्टी अपने पहले के ऊंचे स्तर से ब्रेकआउट कर सकता है या नहीं।Ó तकनीकी आधार पर पहले के सबसे उच्चतम स्तर को तोडऩा भी तेजी का संकेत समझा जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाजार 6,200 या 6,300 के स्तर को पार करता है तो यह तेजी से आगे की ओर बढ़ सकता हैं। अग्रवाल का कहना है, 'अगर प्रतिरोध स्तर अच्छे मार्जिन से आगे की ओर बढ़ता है और बाजार कुछ हफ्ते तक इस स्तर पर बने रहने में सक्षम होगा तो कुल रुझान में बदलाव देखा जा सकता है और हम इसमें तेज बढ़त देख सकते हैं।Ó

सेंसेक्स 20,000 से ऊपर के स्तर पर जाने में सक्षम नहीं हो पाया है। हालांकि निफ्टी से इतर यह अपने तात्कालिक ऊंचे स्तर से आगे की ओर बढ़ा। पिछले हफ्ते अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड खरीदारी की योजना बरकरार रखने की घोषणा की गई तो सेंसेक्स 20,646.6 के स्तर पर चला गया जो करीब तीन सालों का सबसे उच्चतम स्तर था। वहीं दूसरी ओर निफ्टी ने 6,312.5 के स्तर को छू लिया जो चार महीने का भी उच्चतम स्तर नहीं था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सूचकांक में शामिल शेयरों से भी काफी हद तक फर्क पड़ता है।

चुनाव का असर भी
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले छह सालों में बाजार मजबूती के चरण में है और एक ब्रेकआउट से निफ्टी 7,000 के स्तर तक भी जा सकता है। हालांकि कमजोर आर्थिक कारणों और आम चुनावों के दिन नजदीक आने से निफ्टी के लिए 6,200 के स्तर को तोडऩा भी मुश्किल होगा। नाहटा कहते हैं, 'जब भी किसी बड़े घटनाक्रम के आसार बनते हैं उस वक्त किसी विशेष क्षेत्र को तोडऩा मुश्किल हो जाता है। निवेशक निवेश माहौल में निश्चितता चाहते हैं जो चुनाव के दौरान संभव नहीं है।Ó

लेकिन कुछ तकनीकी विश्लेषकों को यह महसूस होता है कि इस बार निफ्टी द्वारा 6,200 के ऊपर के स्तर पर जाने की संभावना बढ़ गई है। निफ्टी ने जब से 6,200 के स्तर को छुआ है तब से गिरावट के स्तर में पिछले चार दफा से कमी आ रही है। आनंद राठी फाइनैंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ए के प्रभाकर का कहना है, 'जब भी इसने 6,200 के स्तर को छुआ है तब यह ज्यादा निचले स्तर की ओर भी गया है।

यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में पहले के मुकाबले ज्यादा उछाल के आसार हैं।Ó प्रभाकर का कहना है कि निफ्टी अगर 200 डे मूविंग एवरेज के ऊपर रहता है तो 6,200 के स्तर को पार करने की संभावना 5,841 के स्तर से ही तय होगी। निफ्टी 18.60 अंक गिरकर 5,873.85 के स्तर पर बंद हुआ जबकि दिन का निचला स्तर 5,811.10 था। अगर कोई शेयर या सूचकांक 200 डीएमए के नीचे के स्तर पर जाता है तो यह मंदी का संकेत है जबकि अगर यह इस स्तर से ऊपर की ओर जाता है तो यह सकारात्मक कदम समझा जाता है।

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