यहां दो दिन के सालाना बैंक सम्मेलन के अंतिम दिन गोकर्ण ने कहा, सोने का उंचा आयात कुछ वृहद आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है। ऐसे मंे सोने के वित्तीय विशेषता का लाभ उठाने की जरूरत है।
व्यापार घाटे के रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के साथ ही चालू खाते का घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। अक्तूबर मंे यह तेल और सोने के उंचे आयात की वजह से 12 साल के उच्च स्तर 21 अरब डालर पर पहुंच गया।
गोकर्ण ने बताया कि रिजर्व बैंक के केयूबी राव की अध्यक्षता वाला एक कार्यसमूह जल्द सोने के उंचे आयात से पैदा हुई समस्या से निपटने के उपाय पर रिपोर्ट पेश करेगा। उन्होेंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सोने का सालाना उत्पादन 4,000 टन सालाना पर स्थिर है। घरेलू स्तर पर 1999 से इसकी खपत दोगुना होकर 1,000 टन पर पहुंच चुकी है।
उन्हांेने कहा कि ज्यादा महंगे सोेने का आयात बड़ी मात्रा मंे किया जा रहा है, जिससे समस्या लगातार बढ़ रही है।