अराफात की विधवा सुशा अराफात ने इस अत्यधिक विवादास्पद प्रक्रिया से पहले कहा, यह बहुत ही दुखद है। यह स्तब्ध करने वाली बात है। यह मेरे और मेरी बेटी के लिए आसान बात है।
उन्होंने कहा, लेकिन उनकी मौत से जुड़े बड़े रहस्य को सुलझाने के लिए हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। यदि कोई अपराध हुआ है तो उसका हल अवश्य होना चाहिए।
नवंबर, 2004 में अराफात की हालत तेेजी से बिगड़ी और वह पर्सी सैन्य अस्पताल में चल बसे। उनकी मौत को लेकर कई तरह अफवाहें और अटकलें हैं।
फ्रांसीसी डाक्टर कभी यह नहीं बता पाए कि फलस्तीन के पहले लोकतांत्रिक निर्वाचित राष्ट्रपति की कैसे मौत हो गयी । उनकी पत्नी ने अंत्य परीक्षण का अनुरोध किया भी लेकिन वह नहीं किया गया।
कई फलस्तीनी मानते हैं कि उन्हें इस्राइल द्वारा जहर दे दिया गया। लेकिन जब अल जजीरा ने स्विटरजरलैंड के इन निष्कर्षों का प्रसारण किया कि अराफात की निजी चीजों में असामान्य मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ पोलोनियम मिला, तब इस संकल्पना को बल मिला।