सीवीसी की शुरूआती जांच के अनुसार राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर वकीलों को पैनल में शामिल किया गया और उनके बीच अनुचित कार्य आवंटन....राजस्व तथा गैर-राजस्व मामलों के लिये....के उदाहरण सामने आये।
पिछले वर्ष शुरू जांच में पाया गया कि मंत्रालय के पास राजस्व तथा गैर-राजस्व विशेषग्यों के लिये कोई वर्गीकरण उपलब्ध नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार पैनल में शामिल वकीलों का राजस्व और गैर-राजस्व मामलों के बतौर विशेषग्य वर्गीकरण के लिये अनुभव या प्रोफाइल की जांच समुचित तरीके से नहीं की गयी। सीवीसी ने पाया कि राजस्व विशेषग्य के रूप में पैनल में शामिल वकीलोें के वर्गीकरण में कुछ विसंगतियां थी।
ये गड़बड़ी कानून एवं न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग के अंतर्गत आने वाले न्यायिक खंड में देखी गयी। कानून अधिकारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी मंत्रालय के पास है।
नियमों के मुताबिक केंद्र सरकार की तरफ से कानूनी मामलों के निपटान में कानून अधिकारियों की सहायता के लिये वकीलों का पैनल बनाया जाता है। वरिष्ठ तथा अनुभवी वकीलों का पैनल तीन श्रेणियों....पैनल-ए, पैनल-बी तथा पैनल-सी....में बनाया जाता है।