गिल ने कहा कि देश को आईओसी से नहीं डरना चाहिए जो भारतीय ओलंपिक संघ :आईओए: में चुनावी सुधारों से इंकार कर रहा है। उन्होंने यह कहा कि आईओसी को खुद इन सुधारों को अपनाना चाहिए।
आईओए के चुनाव अगले महीने होने हैं जो विवादों में घिरे हुए हैं और आईओसी ने धमकी दी है कि अगर इनमें सरकार के उम्र और कार्यकाल संबंधित दिशानिर्देशों का पालन किया गया तो भारतीय संस्था की मान्यता रद्द कर दी जायेगी।
आईओसी ने कहा कि आईओए के चुनाव बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के किये जायें।
गिल ने हालांकि आईओसी के इस रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि इससे खेल साम्राज्यवाद का आभास होता है।
उन्होंने जारी बयान में कहा, भारतीय खेल प्रबंधन में यह समस्या लगातार चली आ रही है, हर कोई इससे वाकिफ है। भारी संख्या में राजनीतिक मौजूदगी, लगातार 20 से 40 वर्षों तक पदों पर बने रहना जो ज्यादातर बिना किसी खेल पृष्ठभूमि के हैं।
गिल ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खेल संस्थाओं के संचालन में बदलाव लाने के प्रयास भी विफल रहे थे।