न्यायाधीश बरकत अली जैदी की अध्यक्षता वाले दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने रेलवे सुरक्षा बल के एक पूर्व अधीक्षक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि चूंकि यह मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू होने के पहले का है इसलिए इस मामले में यह लागू नहीं होता।
उन्होंने कहा, हालांकि, यह मामला विभिन्न फोरम से होकर गुजरा है, इसलिए यह थोड़ा चौंकाउ लगता है कि यह नहीं देखा गया कि यह मामला वर्ष 1983 का है जबकि उपभोक्ता संरक्षण कानून 24 दिसंबर 1986 को लागू हुआ।
पीठ ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून इससे पहले के मामलों पर लागू नहीं होता। इसलिए इस आधार पर याचिका खारिज की जाती है।
उत्तरप्रदेश के वसुंधरा निवासी याचिकाकर्ता वी के चतुर्वेदी ने उत्तर रेलवे से 20 लाख रुपये हर्जाना की मांग की थी।