लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूर्व में इस पाठ्यक्रम को ग्रामीण स्वास्थ्य देखरेख स्नातक :बीआरएचसी: पाठ्यक्रम के रूप में प्रस्तावित किया गया था जिसे भारतीय चिकित्सा परिषद से सलाह के बाद बदला गया।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को पेश करने के संबंध में जरूरी आधारभूत संरचना और सुविधाओं के आकलन के लिए कार्य बल का गठन किया गया है।
मंत्री ने कहा कि यह पाठ्यक्रम तीन वर्षो का होगा और भौतिकी, रसायन एवं जीव विग्यान विषय से 12वीं पास करने वाले छात्र इसमें दाखिले के पात्र होंगे।