हाल ही में कंबोडिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात में चीनी निवेशकों को भारत में निवेश का न्यौता दिया था।
इस तरह की यह दूसरी वार्ता है जिसका उद्देश्य तीव्र आर्थिक वृद्धि के रास्ते पर अग्रसर दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार गतिविधियों को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब पश्चिमी दुनिया के देश आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
इस मौके पर दोनों देशों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध 10 सहमति पत्र पर दस्तखत किये जाने की संभावना है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया करेंगे जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व राष्ट्रीय विकास सुधार आयोग के चेयरमैन झांग पिंग करेंगे।
हाल ही में प्रधानमंत्री ने कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में अपने चीनी समकक्ष वेन च्याबो के साथ सामेवार को बैठक के दौरान निवेश का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापार असंतुलन दूर करने तथा रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
भारत, चीन के साथ बढ़ते व्यापार असंतुलन को लेकर चिंतित है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 40 अरब डालर हो गया है जबकि आपसी देशों का व्यापार 75 अरब डालर का है। इसके समाधान के लिये भारत खासकर सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा तथा औषधि क्षेत्रों में चीनी बाजार में अपनी पहुंच बढाने का रास्ता चाहता है।