उत्तर-पश्चिम दिल्ली की रहने वाली महिला का गुजारा भत्ता बढाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूनम ए बांबा ने उससे नाबालिग बच्चों की स्कूल फीस की रसीद पति को मुहैया कराने का निर्देश दिया ताकि वह सरकार से शिक्षा खर्च ले सके ।
सत्र न्यायालय का यह फैसला महिला की उस अपील पर आया जिसमें उसने मजिस्ट्रेट अदालत के सितंबर 2009 के फैसले को चुनौती दी थी ।
मजिस्ट्रेट अदालत ने उसके पति को उसके और दो नाबालिग बच्चों के गुजारा भत्ता के लिए 3,500 रूपये देने का निर्देश दिया था ।
महिला ने दलील दी कि इतनी कम राशि में उसका और दो बच्चों का गुजारा होना बेहद मुश्किल है जबकि उसके पति का वेतन 2010 से बढकर 38,000 रूपये हो गया जिसके बाद अदालत ने गुजारे भत्ते की राशि को बढाकर 5,500 रूपये कर दी ।
एसीजे ने कहा, मेरी राय है कि अपीलकर्ता और उसके बच्चों के गुजारा भत्ता के लिए 5,500 रूपये की राशि न्यायपूर्ण होगी ।
भाषा
11231743 दि
नननन