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'सुस्त रहेगी दोपहिया उद्योग की रफ्तार'
बीएस संवाददाता / अहमदाबाद March 29, 2013

इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2012-13 में देसी दोपहिया वाहन उद्योग की विकास दर नरम रहने के आसार हैं और मात्रा के लिहाज से बढ़त दर करीब 4-5 फीसदी रह सकती है क्योंकि मांग में सुस्ती है। पिछले तीन सालों में दोपहिया वाहन उद्योग का सीएजीआर हालांकि 21.8 फीसदी रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यम अवधि में दोपहिया वाहन उद्योग का सीएजीआर 8-9 फीसदी रहने का अनुमान है और इस तरह से साल 2016-17 तक कुल वाहनों की संख्या (देसी व निर्यात) 220-230 लाख हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, लंबी अवधि के लिहाज से विकास का हमारा अनुमान 9-11 फीसदी है क्योंकि हमारा मानना है कि देसी दोपहिया वाहन उद्योग के साथ कई सकारात्मक चीजें जुड़ी हुई हैं और इनमें अनुकूल जनसंख्या वितरण, दूसरे उभरते हुए बाजारों के मुकाबले दोपहिया वाहनों की संख्या कम होने, विकास के चरण में रही सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था, बढ़ता शहरीकरण। इसके अलावा मुख्य रूप से अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत दूसरे विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अपार मौके उपलब्ध होना।

देसी वाहन की विकास दर साल दर साल के हिसाब से 3.9 फीसदी रही है जबकि 2012-13 के पहले 11 महीने में निर्यात 1.1 फीसदी घटा है। भारतीय दोपहिया वाहन उद्योग फिलहाल मंदी से जूझ रहा है, जैसा साल 2007-08 व 2008-09 में देखा गया था।

उच्च महंगाई, मजबूत ब्याज दरें, पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मॉनसून से देसी बाजार में दोपहिया की मांग कमजोर हुई है। इसके अलावा विदेश में होने वाली बिक्री भी प्रभावित हुई है क्योंकि वहां भी ब्याज दरें मजबूत हुई हैं और श्रीलंका में आयात शुल्क बढ़ा है। इसके अलावा अर्जेंटीना की तरफ से लगाई गई कारोबारी बाधा से भी बिक्री पर असर पड़ा है। इसके साथ ही पिछले 18 महीने में दोपहिया निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन में कटौती हुई है और इस वजह से भारत में कलपुर्जे के मूल निर्माता (ओईएम) विदेशी बाजार में कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी के लिए मजबूर हुए और ये चीजें निर्यात की मात्रा पर दबाव डाल रही है।

कैलेंडर वर्ष 2012 के बिक्री आंकड़ों के मुताबिक हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया भर में दोपहिया वाहनों का सबसे बड़ा बाजार है और कुल बिक्री 138 लाख इकाई रही है। इसने 126 लाख इकाई की बिक्री करने वाले चीन को पीछे छोड़ दिया है। वास्तव में 2012 में दोपहिया की बिक्री भारत में एक साल पहले के मुकाबले 5.8 फीसदी बढ़ी है। उधर, चीन व इंडोनेशिया में देसी मांग (दूसरा व तीसरा सबसे बड़ा दोपहिया बाजार) क्रमश: 10 व 9.2 फीसदी घटी है।

इसके अलावा कई कंपनियों ने नए निवेश का ऐलान किया है। इक्रा का मानना है कि ऐसे निवेश से उद्योग के मुनाफे पर निकट भविष्य में असर पड़ सकता है क्योंकि निकट भविष्य में बिक्री में और गिरावट आ सकती है।

Keyword: ICRA, Automobile, Recession,
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