| टॉप्स और लौंग के पेच पर घटा आयात शुल्क | | दिलीप कुमार झा / मुंबई September 21, 2012 | | | | |
जेम्स ऐंड ज्वैलरी निर्यातकों को आंशिक राहत देते हुए सरकार ने गोल्ड फाइंडिंग्स (जेवर में इस्तेमाल होने वाले पेच-हुक आदि) पर आयात शुल्क मौजूदा 10 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी कर दिया है और यह फौरन लागू हो गया है। गोल्ड फाइंडिंग्स का इस्तेमाल आभूषणों में होता है। अमूमन मिश्र धातु के बने ये छोटे कलपुर्जे होते हैं जैसे हुक, क्लैस्प, क्लैंप, पिन, कैच, स्क्रू बैक आदि। इनका इस्तेमाल आभूषण के एक हिस्से या पूरे आभूषण में होता है। ये वस्तुत: आभूषण क्षेत्र के लिए कच्चा माल होते हैं, जिसका आयात तैयार कीमती धातुओं के आभूषण में इस्तेमाल के लिए होता है या फिर इनकी खपत देश में होती है।
यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे आभूषणों मसलन नाक की लौंग (नोज पिन), बाली (ईयर रिंग) और अन्य छोटे नाजुक आभूषणों की कुल कीमत में इनकी हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है। सामान्य तौर पर कुछ उपभोक्ता आभूषण के साथ गोल्ड फाइंडिंग्स चाहते हैं, जबकि लागत के प्रति संवेदनशील ग्राहक सोने के साथ अन्य धातुओं के मिश्रण वाले फाइंडिंग्स के इस्तेमाल को प्राथमिकता देते हैं।
पिछले दो वर्षों से गोल्ड फाइंडिंग्स पर आयात शुल्क बढ़ रहा था। साल 2010-11 के बजट में केंद्र सरकार ने इसे 500 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़ाकर 750 रुपये प्रति 10 ग्राम कर दिया था। 16 जनवरी 2012 को इसे 750 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया था और 16 मार्च 2012 को घोषित बजट में इसे 10 फीसदी कर दिया गया।
जेम्स ऐंड ज्वैलरी उद्योग ने इस कदम का स्वागत किया है। जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के चेरमैन राजीव जैन ने कहा कि फाइंडिंग्स पर शुल्क में बढ़ोतरी से देश से निर्यात होने वाले आभूषणों पर विपरीत असर पड़ रहा था और एक तरह के आभूषण के निर्यात पर इससे सवालिया निशान लग गया क्योंकि विदेशी खरीदार आयातित फाइंडिंग्स पर जोर देते हैं। जेम्स ऐंड ज्वैलरी उद्योग ने इस कदम पर सरकार के प्रति आभार जताया है। उद्योग का कहना है कि यह लाखों लोगों की जीविका का साधन है और यह उद्योग निर्यात आय में करीब 14 फीसदी का योगदान करता है। देश भर में 12 लाख लोगों को रोजगार देने वाले इस उद्योग ने सरकार के सामने यह समस्या उठाई थी। काउंसिल ने वाणिज्य विभाग और राजस्व विभाग के साथ बैठक कर इस बारे में शिकायत दर्ज कराई थी।
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