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एफएमसी ने की मार्जिन में कटौती
उतार-चढ़ाव और कीमतों में नरमी के बाद वायदा नियामक ने उठाया कदम
दिलीप कुमार झा और रामवीर सिंह गुर्जर / मुंबई/नई दिल्ली September 21, 2012

वायदा बाजार आयोग ने एक्सचेंजों में कृषि जिंसों पर विशेष मार्जिन में कटौती कर निवेशकों को राहत दी है और इस कदम को वायदा बाजार के लिए बेहतर माना जा रहा है। एफएमसी के फैसले के बाद अब क्लाइंट के पास हेजिंग के लिए ज्यादा रकम उपलब्ध होगी। नियामक ने सरसों पर नकद मार्जिन मौजूदा 15 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है, वहीं चने के लंबी अवधि के अनुबंध पर 20 फीसदी मार्जिन को घटाकर 10 फीसदी कर दिया है और सभी चालू अनुबंध पर यह 24 सितंबर से लागू होगा।

इससे पहले एफएमसी कपास खली से 20 फीसदी, जौ से 10 फीसदी विशेष मार्जिन हटा चुका है। आलू पर भी मार्जिन 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर चुका है। जब कोई क्लाइंट जिंस एक्सचेंज में कारोबार शुरू के लिए पंजीकरण कराता है, तो शुरुआत में 5 से 7.5 फीसदी मार्जिन लगता है, लेकिन सट्टबाजी के चलते दाम बढऩे पर एफएमसी इसमें इजाफा करता रहता है। एफएमसी के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि मार्जिन का निर्धारण करने का कीमत ही अकेला तरीका नहीं है। जब स्पेशल नकद विशेष मार्जिन लगा था, उस समय दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़े थे। अब खरीफ उत्पादन के आंकड़े भी आने वाले है। ऐसे में लंबे समय तक एक जैसी नीति जारी रखने का कोई तुक नहीं है।  इसलिए कई कृषि जिंसों पर विशेष मार्जिन घटाने का निर्णय लिया गया है।  कमोडिटीइनसाइटडॉटकॉम के वरिष्ठ जिंस विश्लेषक प्रशांत कपूर कहते हैं कि बारिश सुधरने से खरीफ में उत्पादन पहले से ज्यादा होने की उम्मीद है। अच्छी बारिश का फायदा रबी में बोई जाने वाली सरसों व चने की फसल को भी होगा।

जून के पहले हफ्ते में खरीफ में बोए जाने वाले कई जिंसों में असामान्य रूप से उतारचढ़ाव देखा गया था, जब भारतीय मौसम विभाग ने इस साल मॉनसून की बारिश में कमी की भविष्यवाणी की थी। बारिश में कमी से तब उत्पादन पर असर पडऩे का अनुमान लगाया गया था। लेकिन मॉनसून में सुधार और एफएमसी की तरफ से कैश मार्जिन लगाए जाने के बाद न सिर्फ उतारचढ़ाव पर लगाम लगा बल्कि कृषि जिंसों की वास्तविक कीमतें भी नजर आने लगी।
मॉनसून सुधरने के साथ कृषि जिंसों दाम घटे हैं। नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) में बीते दो माह के दौरान सरसों 8.77 फीसदी गिरकर 4,118 रुपये, चना 9.92 फीसदी गिरकर 4,520 रुपये, जौ 24.72 फीसदी गिरकर 1,191 रुपये रह गया है।

अधिकारी ने कहा कि बारिश सुधरने से आगे भी वायदा बाजार में सट्टेबाजी की संभावना सीमित है। इंडियाबुल्स कमोडिटी लिमिटेड के सहायक निदेशक (शोध) बदरुद्दीन ने कहा कि विशेष मार्जिन घटने से अब छोटे खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ेंगी। उनके मुताबिक आगे त्योहारों को देखते हुए चने के मामले में फंडामेंटल मजबूत होने से इसके दाम 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ सकते हैं। सोयाबीन का उत्पादन बढऩे की संभावना से खाद्य तेल में सरसों की मांग बहुत ज्यादा नहीं बढऩे वाली है, ऐसे में इसमें तेजी आना मुश्किल है।

ऐंजल कमोडिटी की रिपोर्ट के मुताबिक सरसों के रिकॉर्ड भाव की वजह से वायदा बाजार मेंं रोजाना मात्रा के हिसाब से कारोबार घट रहा है। दो माह पहले के 4 लाख टन के मुकाबले इस समय 1.5-2 लाख टन कारोबार हो रहा है। इस दौरान चने का कारोबार स्थिर बना हुआ है। एमके कॉमट्रेड लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी अतुल शाह ने कहा कि नियामक के पास वायदा एक्सचेंजों में दाम नियंत्रित करने केलिए दो विकल्प है। एक क्लाइंट का एक्सपोजर कम करने के मार्जिन बढ़ाया जाए। दूसरा विकल्प पोजीशन लिमिट घटाना है। कृषि जिंसों में उतारचढ़ाव कम हो गया है। इस साल जुलाई की शुरुआत में कई जिंस हर दूसरे दिन अपर व लोअर सर्किट के दायरे में आ रहे थे। अब शायद ही ऐसा देखने को मिल रहा है। ऐसे में वायदा बाजार आयोग ने दोनों ही मकसद हासिल कर लिया है और इस वजह से मार्जिन में कटौती कर दी है।

Keyword: FMC, Cotton, Margin,
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