| रुपया साढ़े चार महीने के उच्चतम स्तर पर | | नीलाश्री बर्मन और पर्णिका सोखी / मुंबई September 21, 2012 | | | | |
शुक्रवार को रुपया पिछले साढ़े चार महीनों के सर्वोच्च स्तर पर बंद हुआ। इसके दिसंबर के अंत तक 52 के स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस बारे में एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ कहते हैं, 'अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से तीसरे चरण की मात्रात्मक नरमी (क्वांटिटेटिव ईंजिंग) की घोषणा और स्थानीय सरकार के सुधार के मोर्चे पर आगे बढऩे के संकेतों से रुपये पर सकारात्मक असर पड़ा है। इसके साथ ही चालू खाता घाटा सीमित रहने की संभावना है। मेरा मानना है कि दिसंबर के अंत में रुपया डॉलर के मुकाबले 52-52.50 पर रह सकता है।'
शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 54.16 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 53.34 के स्तर पर पहुंच गया और बाद में गुरुवार के 54.39 रुपये के मुकाबले 53.47 रुपये पर बंद हुआ। सरकार के भारतीय कंपनियों के विदेश में रकम उधार लेने पर विदहोल्डिंग टैक्स में कमी करने से भी रुपये को तेजी मिली। विदहोल्डिंग टैक्स कम होने से इन कंपनियों का उधारी खर्च कम हो जाएगा। इसके अलावा सुधार के मोर्चे पर सरकार के आगे बढऩे से रेटिंग कम होने का खतरा भी कम हो गया है। एचएसबीसी इंडिया में प्रबंध निदेशक (वैश्विक बाजार प्रमुख) हितेंद्र दवे ने कहा, 'रुपये में सुधार निवेशकों के भारतीय मुद्रा के प्रति सकारात्मक रुझान को दर्शा रहा है। सुधार की प्रक्रिया जारी रहने से रुपये को और मजबूती मिलेगी।' दवे का मानना है कि अगर निकट अवधि में निवेशकों से जुड़े उपाय लगातार किए जाते रहे तो रुपये में मौजूदा स्तर से 1 प्रतिशत की और तेजी आ सकती है।
इंडसइंड बैंक के अल्को ऐंड इकनोमिक मार्केट रिसर्च जे मोजेज हार्डिंग ने कहा, 'सरकार के ईंधन पर सब्सिडी कम करने और वित्तीय सुधार कार्यक्रम की ओर बढऩे से भारत की रेटिंग कम होने का खतरा टल गया है।' हार्डिंग के अनुसार सरकार के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक भी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षाओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा जिससे निकट भविष्य में रुपया फरवरी 2012 के 48.60 का स्तर प्राप्त करने में सफल होगा। हार्डिंग ने कहा रुपया नई निकट अवधि में 49-54 के बीच रह सकता है।
इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के निम्रतम स्तर 67.16 पर आ गया था। जुलाई के अंत तक पिछले एक साल में 26 प्रतिशत फिसलने के बाद रुपया अब तक 4 प्रतिशत मजबूत हुआ है। फस्र्टरैंड बैंक के ट्रेजरर हरिहर कृष्णमूर्ति के अनुसार नकारात्मक रुझान के कारण रुपये की हालत इतनी बदतर हुई थी। कृष्णमूर्ति का कहना है कि अब निवेशक डॉलर की बिकवाली कर रहे हैं जिससे दिसंबर के अंत तक अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 52 के स्तर पर आ सकता है।
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