| अब बीमा कारोबार के नियमों में होंगे बदलाव | | एम सरस्वती और मनोजित साहा / मुंबई September 21, 2012 | | | | |
वित्त मंत्रालय के हस्तक्षेप से खुदरा और विमानन के बाद कारोबार की सुस्त रफ्तार झेल रहे बीमा उद्योग की तस्वीर भी बदलने वाली है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ अहम बैठक के बाद वित्त मंत्रालय ने आठ समितियों का गठन किया है। उद्योग के विकास की राह में रोड़ा बने विभिन्न मसलों पर विचार करने वाली इन समितियों की अगुआई बीमा कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारी करेंगे। ये समितियां योजनाओं के वितरण से लेकर उन्हें मंजूरी मिलने समेत अन्य व्यापक मामलों पर रिपोर्ट तैयार करेंगी।
दिलचस्प है कि किसी भी समिति की अध्यक्षता बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) का प्रतिनिधि नहीं कर रहा है। बीमा कंपनियों के अनुसार पारंपरिक योजनाओं के नियमों में बदलाव करने के आईआरडीए के हालिया प्रस्ताव के बाद दोबारा समीक्षा करने की जरूरत पड़ी, क्योंकि अगर इन बदलावों को लागू कर दिया गया, तो इससे उद्योग के विकास पर काफी असर पड़ेगा। पारंपरिक योजनाओं के लिए प्रस्तावित नियमों के तहत पारंपरिक योजना की गारंटी सरेंडर मूल्य को बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। इसमें पारंपरिक योजना धारकों को 7 साल बाद प्रीमियम और बोनस देने का प्रस्ताव है, जिससे बीमा एजेंटों का कमीशन घटेगा और मार्जिन पर असर पड़ेगा।
योजनाओं के दिशानिर्देशों के मामले में बीमा कंपनियों ने सुझाया है कि बीमा नियामक को किसी भी योजना को एक समय सीमा के भीतर अनुमति देनी या रद्द कर देना चाहिए। पेंशन योजनाओं को मंजूरी देने के लिए भी एक आक्रामक रणनीति का सुझाव दिया गया है। एक जीवन बीमा कंपनी के प्रमुख ने कहा, 'हमने प्रस्ताव दिया है कि नियामक को योजनाओं को अनुमति देने में ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए इसलिए हमने सुझाव दिया है कि योजनाओं की कुछ श्रेणियों को आवेदन और इस्तेमाल व कुछ को आवेदन, मंजूरी और इस्तेमाल के तहत रखना चाहिए।'
मंत्रालय ने फैसला किया कि प्रत्येक मुख्य कार्याधिकारी उद्योग से जुड़े मुद्दों, उनके समाधान के सुझाव के बारे में व्यापक नोट तैयार करेगा। पिछले दो साल से बीम उद्योग नियमों में बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सितंबर 2010 में आईआरडीए ने यूलिप पर शुल्क और कमीशन की अधिकतम सीमा तय कर दी थी, जिससे 2011-12 में यूलिप के लिए औसत कमीशन घटकर 4 फीसदी रह गया, जो 2009-10 में 10 फीसदी था। इस साल अप्रैल-जुलाई के दौरान बीमा कंपनियों को नई योजनाओं से 31,180 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जिसमें से 80 फीसदी हिस्सा पारंपरिक योजनाओं का है। कारोबार में पारदर्शिता और ग्राहकों को ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए आईआरडीए नए दिशानिर्देश लाने पर विचार कर रहा है।
|