| कपड़ा उद्योग पर मंदी की मार, विस्तार योजनाएं सुस्त | | विनय उमरजी और शर्लिन डिसूजा / अहमदाबाद, मुंबई September 21, 2012 | | | | |
आर्थिक मंदी के असर से खुदरा परिधान उद्योग भी अछूता नहीं है और इसकी वजह से मौजूदा क्षमता का उपयोग तक नहीं हो पा रहा है और साथ ही साथ कंपनियां अपने विस्तार योजना को थोड़े समय के लिए टालती नजर आ रही है। मसलन आलोक इंडस्ट्रीज ने कताई, बुनाई और टेरी टावेल के क्षमता विस्तार की योजना बनाई थी, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सका। कंपनी के प्रबंध निदेशक दिलीप जिवराजक ने बताया, 'हमने अपनी योजना को रद्द कर दिया है।' हालांकि बिक्री में 35 फीसदी इजाफा होने की उम्मीद है लेकिन भुगतान में देरी हो रही है। पिछले महीनें तक मौजूदा क्षमता का करीब एक तिहाई हिस्सा बेकार पड़ा रहा।
लगभग सभी कंपनियां इस साल सुस्त विकास दर को देखते हए अपना बजट तय कर रही हैं। अरविंद लाइफस्टाइल ब्रांड्स और अरविंद रिटेल के प्रबंध निदेशक जे सुरेश ने बताया, 'अधिकांश तौर पर बिक्री 80 करोड़ रुपये से 140 करोड़ रुपये के बीच ही है। इसके अलावा हम इस साल 30 फीसदी विकास दर की उम्मीद कर रहे हैं जबकि पिछले दो सालों के दौरान यह करीब 50 फीसदी था।'
हालांकि अच्छी खबर यह है कि उद्योग जगत के कुछ लोगों को उम्मीद है कि स्थितियों में सुधार हो सकता है। सुरेश के मुताबिक मई से सितंबर के दौरान बिक्री में गिरावट का माहौल देखने को मिला लेकिन आगामी त्योहारी सीजन से मांग में इजाफा देखने को मिल सकता है। मांग में वैसे तेजी दिखाई भी देने लगी है। भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ के महासचिव डी के नायर ने कहा, 'कपड़ा बनाने वाली कंपनियों की मांग में इजाफा हुआ है और इसकी वजह से क्षमता का अधिकतम उपयोग हो रहा है। पिछले समय के दौरान स्थितियां ठीक नहीं थी लेकिन अब स्थितियों में सुधार हो रहा है।' हालांकि इस बात से अन्य इत्तेफाक नहीं रखते हैं और उनका मानना है कि कमजोर कपड़ा निर्यात से मूल्य श्रृंखला पर असर पड़ेगा।
वरिष्ठ टेक्सटाइल सलाहकार ने बताया, 'इस बात में कोई शक नहीं है कि कुछ क्षेत्रों मसलन डेनिम और सूती शर्ट के क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता को जोड़ा गया है लेकिन अन्य श्रेणियों में क्षमता विस्तार को टाल दिया गया है। देश में निर्यात को गति नहीं मिल सकी है। इसलिए जब घरेलू परिधान बाजार में मंदी आई तो निर्यात में भी इसका असर देखने को मिला और पूरी मूल्य श्रृंखला पर इसका प्रभाव दिख रहा है।' कमजोर निर्यात मांग के कारण जून में सालाना आधार पर भारत के कपड़ा निर्यात में 10.5 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर 1.1 अरब डॉलर रहा।
परिधान निर्यात प्रोत्साहन परिषद के मुताबिक पिछले साल समान अवधि में निर्यात 1.2 अरब डॉलर रहा था। डेनिम के क्षेत्र में भी जब फैब्रिक विनिर्माताओं ने अपनी क्षमता को बढ़ाया, उस समय खुदरा क्षेत्र मंदी की गिरफ्त में था। मफतलाल डेनिम के प्रबंध निदेशक राजीव दलाल ने बताया, 'इस साल कई कंपनियों ने अपनी क्षमता में विस्तार किया। हालांकि पिछले कुछ महीनों के दौरान खुदरा क्षेत्र में नरमी का माहौल रहा है और उस हद तक डेनिम उद्योग पर इसका असर जरूर हुआ है।'
एक अन्य कंपनी के मुताबिक बड़ी कपड़ा कंपनियां भी मांग में आई गिरावट का सामना कर रही है और इसके साथ ही वे अपनी पूर्ण उत्पादन क्षमता का दोहन नहीं कर पा रही है। कई कंपनियों ने हाल के वर्षों में टेक्रोलॉजी अपग्रेडेशन फंड्स स्कीम (टफ्स) की मदद से अपने क्षमता विस्तार कार्यक्रम को पूरा किया है, लेकिन अभी तक इस क्षमता का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालांकि सुधार को ध्यान में रखते हुए टफ्स लंबे समय के लिए उपलब्ध रहता है। कपड़ा राज्य मंत्री पी लक्ष्मी ने कहा, 'हम हर तरीके से उद्योग जगत की मदद कर रहे हैं। हम टफ्स को 12वीं पंचवर्षीय योजना में भी शामिल कर रहे हैं।'
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