| 'संगठित रिटेल से महंगाई पर लगेगी लगाम' | | बहुब्रांड खुदरा में एफडीआई निवेश पर गहमागहमी | | | बीएस सवाददाता / हैदराबाद September 21, 2012 | | | | |
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा है कि खुदरा क्षेत्र के आधुनिक एवं संगठित होने से महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की अनुमति से बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा मिलेगा जो किसानों के लिए फायदेमंद होगा।
शुक्रवार को यहां 'संगठित रिटेल बनाम भारत की कृषि अर्थव्यवस्था' विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए रंगराजन ने कहा, 'पारंपरिक रिटेल की तुलना में मॉडर्न रिटेल बेहतर कीमतों की पेशकश करने में अधिक उपयुक्त है जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।'
रंगराजन के अनुसार मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई की अनुमति दिए जाने का ताजा सरकारी निर्णय रिटेल क्षेत्र को बड़ी ताकत प्रदान करेगा। इस पहल से संबद्घ बुनियादी ढांचे में विकास को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इसके जरिये होने वाले कुल निवेश का 50 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'भारत एक विशाल देश है। यहां बड़े रिटेलरों के साथ साथ छोटे किसानों के लिए भी अवसर उपलब्ध होंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि किराना स्टोर मालिक और छोटे व्यापारी इससे प्रभावित होंगे, क्योंकि फूड में कुल मॉर्डन रिटेल की भागीदारी लगभग 25-30 फीसदी हो चुकी है। हालांकि उन्होंने कहा कि ये किराना स्टोर और हॉकर मॉर्डन रिटेल में बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं, बशर्ते कि वे संगठित रिटेल में शामिल हो सकें या पूंजी लगा कर और बेहतर प्रशिक्षण के जरिये स्वयं को आधुनिक बना सकें। ये छोटे कारोबारी फ्रेंचाइजी के जरिये भी स्वयं को संगठित कर सकते हैं।
सुधार के मोर्चे पर सरकार के प्रयासों को ध्यान में रखते हुए रंगराजन का मानना है कि अगले साल वृद्घि दर चालू वर्ष की 6.7 फीसदी की अनुमानित दर की तुलना में बेहतर रहेगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'वृद्घि दर में सुधार आएगा। 12वीं पंचवर्षीय योजना में हमने 8.2 फीसदी की विकास दर का अनुमान व्यक्त किया है जिसका मतलब है कि इस योजना के आखिरी वर्ष में वृद्घि दर लगभग 9 फीसदी रहनी चाहिए।' रंगराजन ने कहा कि डीजल की कीमत समेत किसी भी प्रशासित मूल्य में वृद्घि का तुरंत प्रभाव कीमत सूचकांक पर दिखेगा। हालांकि उन्होंने डीजल की कीमत में 5 रुपये तक की ताजा वृद्घि को यह कहते हुए जायज ठहराया कि ऐसे किसी उपाय के अभाव में राजकोषीय घाटा और बढ़ जाएगा।'
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