| अब एयर इंडिया पर सरकार को नोटिस | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 21, 2012 | | | | |
उच्चतम न्यायालय ने विशेष जांच टीम या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से एयर इंडिया के मामलों में आपराधिक जांच कराने की याचिका पर आज नोटिस जारी किया है। सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की अगुआई वाले पीठ ने केंद्र, एयर इंडिया, सीबीआई और सीवीसी को नोटिस भेजे हैं।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने याचिका में आरोप लगाया है कि 2004-08 में तत्कालीन नागर विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के कार्यकाल के दौरान बड़ा घोटाला हुआ है। याचिका में कहा गया है कि विदेशी विमान विनिर्माताओं को फायदा पहुंचाने के लिए 67,000 करोड़ रुपये में 111 विमान खरीदे गए, हजारों करोड़ रुपये भुगतान कर विमान पट्ट पर लिए गए, विदेशी विमानन कंपनियों को द्विपक्षीय अधिकार दिए गए जबकि बदले में एयर इंडिया के लिए ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। इस दौरान निजी विमानन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए फायदे वाले हवाईमार्गों पर एयर इंडिया को उड़ान बंद करने के लिए कहा गया।
भूषण के अनुसार दो संसदीय समितियों ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट दी है और पूरे मामले की जांच कराने की सिफारिश की है। इसके बाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी इन तथ्यों की पुष्टि करते हुए विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल की गई याचिका में लगाए गए आरोपों से सहमति जताते हुए अदालत ने कहा था कि नागरिक उड्डïयन मंत्रालय के फैसलों की वास्तविकता पर गंभीर सवाल उठते हैं और इनकी जांच कराने की जरूरत है। भूषण के अनुसार सीबीआई या एसआईटी से आपराधिक जांच कराने के बजाय सरकार ने ससंदीय लेखा समिति को इस मसले की जांच करने के लिए कहा। इसलिए उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई।
याचिका में आरोप है कि इतने गलत कदम उठाने के बाद मंत्रालय ने आगे बढ़ते हुए दो राष्टरीय विमानन कंपनियां-एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का विलय कर दिया। इस विलय के कारण महज 100 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही एयर इंडिया , जिसके पास विमान खरीदने की क्षमता भी नहीं थी, तुरंत घाटे में चली गई, जो हर साल तेजी से बढ़ता रहा। याचिका में कहा गया कि जाहिर है ये फैसले बिना सोच-विचार के लिए गए थे और इनसे निजी कंपनियों को लाभ हुआ, जो भ्रष्टïाचार निवारण अधिनियम के तहत जुर्म है। इसके अलावा अरबों डॉलर खर्च कर हुए विमान खरीद सौदों के एवज में भारी रिश्वत भी मिली है।
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