| आवश्यक दवाओं के मूल्य पर मंत्रियों की बैठक आज | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 19, 2012 | | | | |
आवश्यक दवाओं की कीमतों पर अंतिम निर्णय के लिए प्रस्तावित राष्टï्रीय औषधि मूल्य निर्धारण नीति पर मंत्रिसमूह (जीओएम) की बैठक गुरुवार को होने जा रही है। पिछले सप्ताह ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। मंत्रिसमूह की अध्यक्षता कृषि मंत्री शरद पवार के पास है और इसकी बैठक में दवाओं की उस सूची पर विचार किया जाएगा जिन्हें सीधे सरकारी नियंत्रण के अधीन लाया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही उन आवश्यक दवाओं की कीमतों को तय करने की प्रक्रिया को भी सरकार के अधीन लाने पर विचार किया जाएगा।
अधिकारी के मुताबिक जीओएम में 384 दवाओं और 652 विशेष दवाओं को बनाने की तकनीक को प्रत्यक्ष मूल्य नियमन के तहत लाए जाने की संभावना है। हालांकि अभी भी कई संबंधित मंत्रालय कीमत को तय किए जाने की प्रक्रिया पर आम सहमति नहीं बना पाए हैं। दवाओं की कीमतों को तय किए जाने के मामले में मंत्रिसमूह कॉस्ट प्लस और बाजार आधारित प्रक्रिया समेत अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
फिलहाल नैशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) प्रत्यक्ष तौर पर 74 दवाओं की कीमतों का नियंत्रण करती है। इन दवाओं की कीमतों पर एनपीपीए का नियंत्रण होता है जो कि कॉस्ट प्लस नीति पर आधारित होता है। बाकी की दवाओं के लिए दवा कंपनियों को सालाना उनकी कीमत में 10 फीसदी तक का इजाफा करने की अनुमति होती है और अगर उन्हें इस सीमा से अधिक तक कीमतों में इजाफा करना होता है तो उन्हें इसके लिए नियामक से मंजूरी लेनी होती है। दवा उद्योग बाजार आधारित कीमत प्रणाली के पक्ष में है और उसने प्रत्यक्ष तौर पर कीमत नियंत्रण के तहत 384 दवाओं को लाने की मांग की है। इसके साथ उद्योग जगत ने इस बात की मांग की है पहले से जिन दवाओं की कीमत 3 रुपये से कम है, उसे इस दायरे से बाहर रखा जाए।
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