| ग्राहकों पर ओएमसी की नजर तेज | | कल्पना पाठक / मुंबई September 19, 2012 | | | | |
सरकार ने रियायती दर पर उपलब्ध रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या निर्धारित कर दी है और ऐसे में कई ऐसे उपभोक्ता हैं जो अब तक 6 सिलिंडरों की खपत कर चुके हैं और अब अगर वे सातवें सिलिंडर की मांग करते हैं तो उन्हें इसके लिए उन्हें बाजार भाव पर यानी करीब 750 रुपये प्रति सिलिंडर का भुगतान करना पड़ेगा।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन एक सॉफ्टवेयर को विकसित कर रहे हैं जिसका इस्तेमाल डीलर करेंगे और इस सॉफ्टवेयर की मदद से उन्हें किसी उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए सिलिंडरों की संख्या का पता लगाने में मदद मिलेगी।
हालांकि यह सॉफ्टवेयर पूरी तरह से सिलिंडरों के दुरुपयोग पर रोक लगाने में सफल नहीं होगा और इस संभावना को देखते हुए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने अपने बिक्री अधिकारियों और वितरकों को उनके पत्ते पर जाकर परिवारों के बारे में दी गई सूचनाओं को सत्यापित करने का निर्देश जारी किया है। एक तेल विपणन कंपनी के कार्यकारी निदेशक (एलपीजी) ने कहा, 'हमने अपने वितरकों को और अधिक सतर्क रहने का आदेश दिया है और जमीनी आधार पर उचित कनेक्शनों की जांच पड़ताल करें। इसके साथ ही हम लोगों से स्वैच्छिक तौर पर एक से अधिक कनेक्शनों को समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। ऐसा नहीं होने की स्थिति में हम कानूनी रास्ता अपनाएंगे।'
विश्लेषकों के मुताबिक प्रति उपभोक्ता सिलिंडरों की संख्या निर्धारित किए जाने से सालाना 14,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। निर्मल बैंग इक्विटीज के आशुतोष भारद्वाज और विवेक सरीन ने कहा, 'लेकिन राजनीति बाध्यताओं को देखते हुए हमें लग रहा है कि सरकार प्रति उपभोक्ता सिलिंडरों की संख्या को बढ़ाकर 9 से 10 करने पर विचार कर रही है। हमारे अनुमान के मुताबिक रियायती दर पर उपलब्ध सिलिंडरों की संख्या में अगर एक सिलिंडर का भी इजाफा किया जाता है तो अंडर रिकवरी 1,600 करोड़ रुपये होगी।'
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