| डीजल से जलेगा रेलवे का अधिशेष | |
| डीजल के दाम बढऩे से होगा नुकसान | | दिशा कंवर / नई दिल्ली 09 19, 2012 | | | | |
डीजल के दाम बढऩे और यात्री किराये में वृद्धि को वापस लेने से भारतीय रेल के अधिशेष में 24 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है। वित्त वर्ष 2012-13 में रेलवे का अधिशेष करीब 11,707 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि इस वित्त वर्ष के आरंभ में 15,557 करोड़ रुपये के अधिशेष का अनुमान व्यक्त किया जा रहा था।
रेलवे के आंतरिक संसाधनों में भी करीब 3,850 करोड़ रुपये की गिरावट आने की आशंका है। यात्री किराये में वृद्धि को वापस लेने से रेलवे को 3,150 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसके अलावा डीजल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढऩे से रेलवे को 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
इससे योजनागत खर्च में कमी आएगी। रेलवे हर साल करीब 250 करोड़ लीटर डीजल की खपत करती है। इससे वह 4,500 विभिन्न डीजल लोकोमोटिव इंजनों के जरिये यात्री गाड़ी और माल गाड़ी दोनों को का संचालन करती है। रेलवे ने वित्त वर्ष 2011-12 में करीब 18,000 करोड़ रुपये के ईंधन बिल का भुगतान किया था और हर साल नई सेवाएं शुरू करने के साथ ही इसमें हर साल वृद्धि हो जाती है। कुल मिलाकर रेलवे ने 50 फीसदी डीलज और बिजली बिलों का भुगतान कर दिया है।
रेल मंत्री मुकुल रॉय ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी एसी को छोड़कर पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा घोषित यात्री किराये में वृद्धि को वापस ले लिया था। एक अधिकारी ने कहा, 'इससे रेलवे के आंतरिक संसाधनों मेंं करीब 3,850 करोड़ रुपये की कमी आएगी।Ó इससे रेलवे के राजस्व में कमी के अलावा वित्तीय अधिशेष पर 3 विशिष्टï प्रभाव पड़ेंगे। पहला, अधिशेष में करीब 24 फीसदी की कमी आएगी, दूसरा योजना आकार में करीब 6 फीसदी की कटौती करनी पड़ेगी और अतिरिक्त कोष में करीब 20 फीसदी का नुकसान होगा।
रेलवे ने योजना परिव्यय को करीब 6 फीसदी घटाकर 56,250 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले बजट में सालाना योजना परिव्यय 60,100 करोड़ रुपये रखा गया था। संशोधित योजना आकार को 24,000 करोड़ रुपये के बजटीय सहायता से, 2,000 करोड़ रुपये रेल सुरक्षा कोष से, 14,200 करोड़ रुपये आंतरिक संसाधनों से और 16,050 करोड़ रुपये बजटीय संसाधनों से वित्त पोषित किया जा सकता है। आंतरिक संसाधनों को 18,050 करोड़ रुपये से घटाकर 14,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
कोष में कम पूंजी होने के साथ ही भारतीय रेलवे ने संपत्ति प्रतिस्थापन के माध्यम से अपने खर्च में लगभग 20 फीसदी की कटौती कर दी है। रेलवे ने अपने चार फंडों के माध्यम से 19,990 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जबकि बीते साल के 10,203 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना था। लेकिन निवेश में कटौती के साथ वित्त वर्ष 2011-12 के संशोधित अनुमान की तुलना में खर्च लगभग 60 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान है।
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