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क्रिटिकल बीमा कवर ने पकड़ी तेजी
इसके तहत इलाज पर आए खर्च ही नहीं बल्कि आय को हुए नुकसान की भी होती है भरपाई
प्रिया नायर और योगिनी जोगलेकर / मुंबई September 19, 2012

हृदय घात, मस्तिष्क रक्तस्राव और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए लोग अब क्रिटिकल इलनेस कवर लेने लगे हैं। बीमा कंपनियों का कहना है इस तरह तरह की पॉलिसियों की मांग 10 प्रतिशत तक बढ़ी है। क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारियों का बीमा) के तहत बीमारी का पता लगने पर पॉलिसीधारक को एक मुश्त रकम मिलती है। इस रकम का इस्तेमाल इलाज पर आए खर्च या आय को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकता है।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रमुख (अंडरराइटिंग ऐंड क्लेम्स) संजय दत्ता का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले क्रिटिकल इलनेस कवर में 10-15 प्रतिशत की तेजी आई है। जीवन और गैर-जीवन बीमा कंपनियां दोनों ही इन गंभीर बीमारियों का बीमा करती हैं। आप ये कवर राइडर के तौर पर या अपनी स्वास्थ्य या जीवन बीमा पॉलिसी के साथ स्टैंडअलोन आधार पर ले सकते हैं। अपोलो म्युनिख हेल्थ इंश्योरेंस के मुख्य कार्याधिकारी एंटनी जैकब का कहना है कि चूंकि, क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी के तहत पूर्व निर्धारित रकम एकमुश्त मिलती है, इससे बीमारी के कारण आय को होने वाले नुकसान से भी सुरक्षा मिलती है।

वांटेज इंश्योरेंस ब्रोकर्स के कंचना टी के का कहना है कि सामान्य बीमा कंपनियों की ओर से पेशकश की जाने वाली क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी लेनी चाहिए क्योंकि इसमें अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च का भी बीमा होता है और बीमा का पता लगने पर एकमुश्त रकम मिलती है। जीवन बीमा कंपनियों की क्रि टिकल इलनेस पॉलिसी में एकमुश्त रकम ही मिलती है और इलाज पर आने वाला खर्च पॉलिसीधारक को वहन करना पड़ता है।

भारती एएक्सए जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी अमरनाथ अनंतनारायण का कहना है कि इस तरह के बीमा कवर की मांग ग्रुप पॉलिसी के बजाय इंडिविजुअल पॉलिसियों में अधिक दिख रही है। अनंतनारायण कहते हैं, 'ग्रुप पॉलिसियों के साथ क्रिटिकल इलनेस कवर ने अब भी रफ्तार नहीं पकड़ी है क्योंकि नियोक्ता को प्रीमियम का भुगतान करना होता है और ग्रुप पॉलिसियों के लिए प्रीमियम भी अधिक है। लिहाजा, इस तरह का बीमा कवर देने के लिए नियोक्ता को बहुत अधिक प्रोत्साहन नहीं मिलता है।'

ग्रुप इंश्योरेंस सामान्य तौर पर गंभीर बीमारी होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने और शल्य चिकित्सा का बीमा करता है। लेकिन ग्रुप इंश्योरेंस कवर में गंभीर बीमार का पता लगने पर एकमुश्त रकम नहीं दी जाती है। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के मुख्य कार्याधिकारी के के मिश्रा का कहना है कि अगर आपकी कंपनी ने आपको ग्रुप इंश्योरेंस दे रखा है तो भी अलग से व्यापक पॉलिसी लेनी चाहिए।

मिश्रा कहते हैं, 'स्टैंडअलोन क्रिटिकल इलनेस कवर खर्चीला होता है। एक ऐसी स्वास्थ्य बीमा योजना खरीदनी चाहिए जिसके दायरे में सभी चीजें आती हैं।Ó पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के मुख्य विपणन अधिकारी अक्षय मेहरोत्रा का कहना है कि यह भ्रम है कि एड-ऑन क्रिटिकल इलनेस कवर लेना महंगा है। उनके अनुसार 1 करोड़ रुपये की बीमित रकम पर आपको 3,000-4,000 रुपये अतिरिक्त देना पड़ सकता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की बात करें तो किसी पॉलिसी धारक जिसकी उम्र 36-45 साल के बीच है, उसके लिए 5 लाख रुपये की बीमित रकम के लिए बिना क्रिटिकल इलनेस के11,469 रुपये प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है जबकि  क्रिटिकल इलनेस के साथ प्रीमियम की रकम 16,182 रुपये होती है।

क्रिटिकल इलनेस खरीदते समय आपको उन बीमारियों पर ध्यान देना चाहिए जो पॉलिसी में शामिल हैं और ऐसी पॉलिसी खरीदें जिसके तहत आपके परिवार में बार-बार आने वाली अधिक से अधिक बीमारियां आती हैं। इसके साथ ही आपको अनुबंध में सूचीबद्ध हरेक बीमारी के लिए प्रतीक्षा अवधि पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इसके बाद ही हस्ताक्षर करना चाहिए। इससे आप भविष्य में आने वाले झमेले से बच सकते हैं।

Keyword: Insurance, Scheme, Critical,
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