| बाजार के परिपक्व होने तक एसएमई शेयरों से बनाए रखें दूरी | | विश्लेषक इन शेयरों को लेकर उत्साहित नहीं, उनका कहना है कि मार्केट मेकिंग स्कीम के बावजूद तरलता की कमी एक समस्या हो सकती है | | | नेहा पांडेय देवरस / मुंबई September 19, 2012 | | | | |
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एसएमई प्लेटफॉर्म पर छोटे और मझोले उद्यम क्षेत्र से सूचीबद्ध होने वाली तेजो इंजीनियरिंग आठवीं कंपनी है। इसके अलावा बीसीबी फाइनैंस, ज्यूपिटर इन्फोमीडिया, मोनार्क हेल्थकेयर, ज्वांटेका एजुकेशन बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध हैं।
बीएसई के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन कंपनियों के शेयर अपने निर्गम मूल्य के आसपास कारोबार कर रहे हैं। मिसाल के तौर पर एसआरजी हाउसिंग फाइनैंस का शेयर 20.75 रुपये पर कारोबार कर रहा है जबकि इसका निर्गम मूल्य 20 रुपये था। इसी तरह, मोनार्क हेल्थकेयर, जिसका निर्गम मूल्य 40 रुपये था, वह अब 42 रुपये पर कारोबार कर रहा है। अच्छी बात यह कि निवेशकों को इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है लेकिन निवेश पर उन्हें फायदा भी नहीं हुआ है।
हालांकि एसएमई प्लेटफॉर्म थोड़ा अलग हो जाता है लेकिन एसएमई शेयरों में निवेश की प्रक्रिया किसी दूसरे शेयरों में निवेश की तरह ही है। एसएमई शेयरों में निवेशकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह क्षेत्र ज्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ है। इसके अलावा वेंचर कैपिटलिस्ट का इन कंपनियों में निवेश है, साथ ही छोटे उद्यमों के विकास की काफी संभावनाएं हैं। अगर ये कंपनियां सफल होती हैं तो इनके शेयर अच्छा प्रतिफल दे सकते हैं। हालांकि इनसे जुड़े जोखिम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
जोखिम पर नजर रखने के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि निवेशक इन कंपनियों में अधिक निवेश न करें और न ही अपने निवेश के साथ फंस जाए। सबसे पहले तो नियामक ने निवेश सीमा 1 लाख रुपये या इससे अधिक निर्धारित की है। इस तरह, धनाढ्य निवेशक, संस्थागत निवेशक और बैंक आईपीओ में निवेश योग्य होंगे या ये द्वितीयक बाजार में कारोबार करेंगे। व्यक्तिगत निवेशक बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में निवेश नहीं कर पाएंगे।
ब्रोकरों का कहना है कि प्राथमिक बाजार में निवेशकों की कमी नहीं है लेकिन द्वितीयक बाजार में खरीदार जुटाने में मुश्किलें आ सकती हैं। निवेशकों की मदद के लिए सेबी ने एसएमई शेयरों में मार्केट मेकिंग स्कीम अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब हुआ कि निर्गम के लिए तय मर्चेंट बैंकर आपके लिए खरीदार खोजेंगे या स्वयं शेयर खरीदेंगे। एमएसमई शेयरों को लंबी अवधि तक बनाए रखने के लिए एनएसई ने एसएसमई निर्गमों के लिए कारोबार के समय में परिवर्तन किया है। सूचीबद्धता के समय कोई कंपनी कॉल ऑप्शन या कंटीन्युअस ऑप्शन का सहारा ले सकती है। मिसाल के तौर पर कॉल ऑप्शन के तहत एनएसई में कारोबार का समय पूर्वाह्न के 11 बजे 11:30 बजे तक होगा जबकि कंटीन्युअस ऑप्शन के तहत कारोबार सामान्य कारोबारी अवधि में होगा। कॉल ऑक्शन के समय हरेक इस छोटी अवधि में बिक्री कर पाने में सफल नहीं होंगे जिससे तरलता कम हो जाएगी।
हालांकि बाजार के जानकार एसएमई शेयरों की संभावनाओं को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं। केजरीवाल रिसर्च ऐंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के अरुण केजरीवाल कहते हैं, 'निवेशकों को उसी स्थिति में इन शेयरों में निवेश करना चाहिए अगर वे एक सूझ-बूझ भरा निर्णय लेने में सक्षम हैं। मेरी सलाह में निवेशकों को कम से कम तीन साल के लिए निवेश करना चाहिए क्योंकि मार्केट मेकिंग स्कीम के बावजूद इन शेयरों के लिए लिक्विडिटी एक समस्या हो सकती है।' बीएसई में सूचीबद्ध 7 एसएमई शेयरों में से तीन का पिछले दो कारोबारी सत्रों में कारोबार नहीं हुआ है।
कुछ परंपरागत बातें हैं जिनका ध्यान आपको रखना होगा। जैसा नाम से ही स्पष्टï है एसएसई क्षेत्र की कंपनियां अपने परिचालन के शुरुआती दौर में होती हैं। ज्यादातर निवेशक इस क्षेत्र और इससे जुड़े जोखिम को नहीं समझ सकते हैं। इन कंपनियों के पिछले प्रदर्शन कोई रिकॉर्ड नहीं होता है इसलिए इनके सफल नहीं होने की आशंका भी काफी अधिक होती है। कुछ कारोबारी मॉडलों को लेकर स्थिति स्पष्टï नहीं है। एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के रणनीतिकार और शोध प्रमुख जगन्नाथन थुंगुंंटला कहते हैं, 'छोटी और मझोली आकार की कंपनियों के कारोबारी मॉडल को वैधता मिलने में लंबा समय लग जाता है।'
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