| ममता के कदम पीछे हटने की उम्मीद कम | | बीएस संवाददाता / कोलकाता September 19, 2012 | | | | |
तृणमूल कांग्रेस (तृकां) द्वारा समर्थन वापसी की घोषणा के दूसरे दिन कांग्रेस और तृकां के बीच घमासान चलता रहा।
इसकी शुरुआत तृणमूल के राज्यसभा सांसद ने की। सुबह सबेरे उन्होंने ट्वीट कर पहले चुनाव कराए जाने और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने आर्थिक सुधार के मसले पर प्रधानमंत्री से संपर्क करने से मना कर दिया, उसके बाद उन्होंने सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी। दो घंटे के भीतर कोलकाता से प्रतिक्रिया आ गई। चिदंबरम के मुताबिक इस मामले में मुकुल रॉय मध्यस्थता कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इसका खंडन कर दिया। साथ ही ममता ने कहा, 'कांग्रेस नेता तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत न करें।'
बनर्जी ने एक बार फिर अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि फैसले से वापस हटने का सवाल ही नहीं।
उन्होंने कहा, 'मैं नहीं समझ पा रही हूं कि एक परिवार 6 सिलिंडर में कैसे काम चला सकता है। हो सकता है कि वे (कांग्रेस नेता) न सिर्फ डाइटिंग पर हों, बल्कि वे खाना भी न खाते हों। वे निश्चित रूप से महामानव होंगे।' इस वाक्युद्ध में पश्चिम बंगाल कांग्रेस भी शामिल रही। कांग्रेस के कोटे का कोई भी मंत्री दोपहर बाद हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं हुआ। राज्य कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि सरकार से बाहर निकलने के बारे फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है।
आज की मोर्चेबंदी से इसकी संभावना खत्म होती दिख रही है कि तृणमूल कांग्रेस अपने कदम वापस खींचेगी। बनर्जी ने कहा, 'राज्य सरकारों द्वारा अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने का मसला उठाकर कांग्रेस ने यह नाटक शुरू किया। केंद्र सरकार कांग्रेस शासित राज्यों को अतिरिक्त धनराशि देकर इसकी भरपाई कर सकती है। यह आंख में धूल झोंकने के अलावा कुछ नहीं है।'
पार्टी नेताओं की ओर से आक्रामक प्रतिक्रिया दिए जाने से ऐसा लगता है कि तृणमूल कांग्रेस किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। मुकुल रॉय ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'आंशिक कटौती से मुलायम या मायावती का दिल जीता जा सकता है, लेकिन ममता का नहीं।'
कल हुई बैठक के एक घंटे पहले तक तृणमूल कांग्रेस के ज्यादातर नेता उम्मीद कर रहे थे कि सरकार से मंत्री हट जाएंगे। यह विरोधस्वरूप होगा और सरकार से समर्थन वापसी नहीं होगी। बनर्जी ने सभी सांसदों और राज्य के मंत्रियों से इस मसले पर राय मांगी। पार्टी प्रमुख की राय जाने बगैर ही सबने अपनी राय दी। सबसे पहले बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी से बोलने को कहा। दिलचस्प है कि विवादास्पद रेल बजट के विपरीत उन्होंने इस बार समर्थन वापस लेने की राय दी और गेंद ममता बनर्जी के पाले में डाल दी। ज्यादातर सांसदों और राज्य के मंत्रियों ने यही राय दी। इस मामले में तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी सबसे ज्यादा मुखर रहे और उन्होंने कांग्रेस द्वारा तृणमूल कांग्रेस की उपेक्षा करने के मामले को जोरदार ढंग से उठाया।
बैठक में मौजूद सूत्रों ने कहा कि सौगात राय और सुदीप बंद्योपाध्याय जैसे केंद्रीय मंत्रियों ने रेल मंत्रालय को हो रहे घाटे और बंगाल में चल रही रेल परियोजनाओं में होने वाली देरी का मसला उठाया। उन्होंने राय दी कि केंद्र सरकार को और समय दिया जाना चाहिए। इस बीच ममता ने हस्तक्षेप किया और उन्होंने वह एसएमएस दिखाया, जो उन्होंने सोनिया गांधी को पिछले शुक्रवार को भेजा था, जिसका जवाब नहीं आया। उसी समय एफडीआई पर फैसले की घोषणा की गई थी। उन्होंने केंद्र सरकार के आक्रामक रवैये के बारे में पार्टी सहयोगियों को बताया। अगर जल्द चुनाव होते हैं तो तृणमूल कांग्रेस को फायदा हो सकता है। अब वह समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के फैसले का इंतजार कर रही है कि वे किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं। माना जा रहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय सपा महासचिव किरणमय नंदा से संपर्क में हैं। तृणमूल के एक सांसद ने कहा, 'अगर आंशिक वापसी होती है तो सपा सरकार को बचा सकती है, वर्ना एकमात्र बसपा ही विकल्प रहेगी।'
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