| श्रीलंका संग व्यापार को मिलेगा विस्तार | | शेख जोएब सलीम / नई दिल्ली September 16, 2012 | | | | |
वाहन कलपुर्जे और इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाली देसी कंपनियां पहली बार श्रीलंका के त्रिंकोमाली में अपनी तरह के पहले विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में दम दिखाएंगी। फिलहाल दोनों देश इससे जुड़े प्रस्ताव के अध्ययन के लिए संयुक्त कार्यसमूह के वास्ते सदस्यों को साथ ला रहे हैं। इस मामले की राह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा की हालिया कोलंबो यात्रा के दौरान आगे बढ़ी।
चूंकि श्रीलंका ने दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी अनुबंध (सीईपीए) के तहत मुक्त व्यापार अनुबंध (एफटीए) की भारत की पेशकश को लेकर बहुत गर्मजोशी नहीं दिखाई, ऐसे में यह नया घटनाक्रम खासा अहम हो गया है। अधिकारियों ने कहा कि इंजीनियरिंग उत्पादों और वाहन कलपुर्जों पर केंद्रित एक विशेष भारतीय सेज त्रिंकोमाली में लगाया जाएगा। इस इलाके में सिंहली, तमिल और मूर समुदाय के लोगों की बड़ी तादाद है। प्रस्तावित सेज में भारतीय निजी क्षेत्र के सहयोग से एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भी होगा।
दोनों देश दवा उत्पादन के लिए एक विनिर्माण केंद्र विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि जहां भारतीय खेमे ने नामों को छांट लिया है वहीं श्रीलंका की ओर से अभी ऐसा किया जाना बाकी है।
हालांकि अधिकारियों ने इन नामों का खुलासा नहीं किया क्योंकि अभी उन पर शीर्ष विभाग की मुहर नहीं लगी है। इस मसले पर मंत्रालय ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) से प्रतिक्रिया जुटाने को कहा था। जब सीआईआई अधिकारियों से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी प्रतिक्रिया जुटाने का काम जारी है।
इससे जुड़े लोगों ने यही बताया कि कई भारतीय वाहन कंपनियों की विस्तार की योजना है और उनमें से कुछ ने इस प्रस्ताव में दिलचस्पी दिखाई है। जानकारों के अनुसार सामुद्रिक संपर्क की वजह से श्रीलंका का महत्त्व बढ़ जाता है जबकि वहां मौजूद बेहतरीन बंदरगाह उसे और बेहतर स्थिति में ले आते हैं। कई दक्षिण भारतीय शहरों और श्रीलंका के बीच हवाई संपर्क भी बहुत बढिय़ा है।
अधिकारी ने कहा, 'ये सभी आकर्षण भारतीय कंपनियों को लुभा रहे हैं।' प्रस्ताव का एक और पहलू सेज के जरिये श्रीलंका में कौशल विकास गतिविधियों को भी बढ़ाना है, जिसके लिए प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा प्रस्ताव में त्रिंकोमाली में आतिथ्य सत्कार और पर्यटन को बढ़ावा देने की बात भी है। त्रिंकोमाली में नैसर्गिक सौंदर्य वाले कई बीच हैं तो ऐसे धार्मिक स्थल भी हैं जो हिंदू, बौद्घ और दूसरे धर्मों के अनुयायियों के लिए बेहद मायने रखते हैं।
श्रीलंका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते पहले से ही खासे मजबूत हैं। दक्षिण एशिया में श्रीलंका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2011 में दोनों देशों के बीच 5.16 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ जबकि इससे पहले साल यह आंकड़ा 3.63 अरब डॉलर था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, टाटा, सिएट, निकोलस पीरामल, अशोक लीलैंड, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी कई भारतीय कंपनियां पहले से ही श्रीलंका में काम रही हैं।
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