शर्मिला को जीवित रखने के लिए जबरदस्ती नाक से भोजन दिया जाता है।
दो नवंबर 2000 को इम्फाल हवाईअड्डे के समीप मालोम में असम रायफल्स के जवानों के साथ कथित मुठभेड़ में दस व्यक्तियों की मौत हो गई थी। मृतकों में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त एक लड़का भी था।
उन दिनांे शर्मिला सामाजिक कार्यकर्ता थीं और एक अखबार के लिए स्तंभ लिखती थीं। घटना के विरोध में उन्होंने एएफएसपीए को रद्द करने की मांग करते हुए पांच नवंबर 2000 से अनशन शुरू किया था। अगले दिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर आत्महत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया ।
तब से शर्मिला को समय समय पर अदालत में पेश कर पुन: गिरफ्तार कर लिया जाता है। पोरोम्पेट स्थित सरकारी अस्पताल के एक वार्ड को जेल में तब्दील कर वहां शर्मिला को रखा गया है और उन्हें जबरदस्ती नाक से खिलाया जाता है।
शर्मिला को कई वैश्विक पुरस्कार मिल चुके हैं। देश के विभिन्न भागों से कई जानीमानी हस्तियां उनकी मांग का समर्थन करते हुए उनसे मिल चुकी हैं।
उनके भाई और प्रवक्ता इरोम सिंहजीत ने कहा कि जस्ट पीस फाउंडेशन सहित अन्य सामाजिक संगठन इम्फाल में मोमबत्तियां लेकर प्रदर्शन करेंगे तथा बहसों का आयोजन भी किया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ऐहतियात के तौर पर शहर के विभिन्न भागों में सुरक्षा और पुलिस बल तैनात किए गए हैं।
भाषा