| सुब्बाराव की दुविधा | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली. September 16, 2012 | | | | |
सरकार ने आखिरकार आर्थिक सुधारों के लिए तत्परता दिखा दी लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव के सामने अब कठिन चुनौती है। सवाल यह है कि वह नीतिगत दरों में कटौती कर विकास को बढ़ावा देंगे या महंगाई पर काबू के लिए यथास्थिति बनाए रखेंगे? महंगाई दर अब भी 7.6 फीसदी पर है।
बिजनेस स्टैंडर्ड बाजार भागीदारों के सुझाए विकल्पों के आधार पर चार परिदृश्य पेश कर रहा है...विकल्प और जोखिम
1. दरों में कटौती की आस लेकिन महंगाई का जोखिम बरकरार
2. दरों में यथास्थिति लेकिन विकास होगा प्रभावित साथ ही तालमेल में कमी का संकेत
3. यथास्थिति लेकिन आगे कटौती के संकेत। इस कदम से बाजार और निवेशकों को हो सकती है मायूसी
4. दरों में कटौती लेकिन सख्त रुख कायम। इससे बैंक संभवत: ग्राहकों को न दें लाभ
बेहतर दांव : सीआरआर में कटौती लेकिन रीपो दर बरकरार रहने से नकदी प्रवाह बढ़ेगा और ब्याज दरें हो सकती हैं कम
कटौती की ओर कदम!
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