| आईटीसी: नहीं हट रहे हैं अनिश्चितताओं के बादल | | प्रिया कंसारा पंड्या / मुंबई September 16, 2012 | | | | |
एफएमसीजी दिग्गजों में शुमार आईटीसी लिमिटेड ने पिछले एक साल के दौरान शेयर बाजार में हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) की तुलना में खराब प्रदर्शन किया है। सिगरेट पर लागू करों में वृद्घि और भारत में सामान्य पैकेजिंग मानकों को लागू किए जाने से जुड़ी चिंताओं ने आईटीसी के शेयर प्रदर्शन को चालू तिमाही में सीमित कर दिया है। एचयूएल में 18 फीसदी और बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स में 7 फीसदी की बढ़त के विपरीत आईटीसी ने सिर्फ 2 फीसदी तक की वृद्घि दर्ज की।
विश्लेषकों का कहना है कि लेकिन एक साल में शेयर कीमतों में 60 फीसदी की शानदार तेजी के बाद एचयूएल के महंगे मूल्यांकन (वित्त वर्ष 2014 की अनुमानित आय के 31 गुना) ने आईटीसी के शेयर को 24 गुना पर आकर्षक बना दिया है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आईटीसी का सिगरेट व्यवसाय अतीत में अपेक्षाकृत स्थिर रहा है और तेजी से बढ़ रहा गैर-सिगरेट एफएमसीजी व्यवसाय के जल्द ही बराबरी की स्थिति में आने की संभावना है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पैकेजिंग मानकों से जुड़ी ताजा चिंताओं का असर दिखने की आशंका नहीं है और मूल्यवर्धित कर दर (वैट) में वृद्घि से जुड़ी चिंता जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद ही हल होगी। हालांकि आईटीसी का होटल व्यवसाय घरेलू समस्याओं की वजह से प्रभावित हुआ है, लेकिन आकार के लिहाज से यह अपेक्षाकृत काफी छोटा (राजस्व और मुनाफे का लगभग तीन फीसदी) है। बाकी व्यवसायों (कागज और कृषि) के लिए मुनाफा वृद्घि और रिटर्न अनुपात अच्छा रहा है। इस पृष्ठïभूमि में रिस्क-रिवार्ड समीकरण आईटीसी के शेयर के लिए अनुकूल है।
धीमी वृद्घि
पिछले समय में जब आईटीसी ने करों में वृद्घि के भार को कम करने के लिए भारी कीमत वृद्घि का सहारा लिया था तो इसका कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि कंपनी एबिटा मार्जिन को पिछले पांच साल में 26-31 फीसदी के दायरे में बनाए रखने में सफल रही है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों अर्णब मित्रा और अक्षय सक्सेना ने पिछले महीने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, 'आईटीसी के सिगरेट व्यवसाय की एबिटा वृद्घि सालाना वित्त वर्ष 2003-12 के दौरान 15-20 फीसदी के दायरे में स्थिर (वित्त वर्ष 2004 को छोड़ कर) रही है।' विश्लेषकों का मानना है कि यह रुझान वित्त वर्ष 2013 में भी बरकरार रहने की संभावना है।
केंद्रीय बजट 2012-13 में उत्पाद शुल्क में 20 फीसदी की वृद्घि और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा वैट बढ़ाए जाने के बावजूद सिगरेट व्यवसाय जून तिमाही में काफी हद तक सपाट बना रहा जबकि एबिटा मार्जिन में 140 आधार अंक का सुधार दर्ज किया गया। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों ने कहा है, 'सिगरेट व्यवसाय में आईटीसी की मूल्य निर्धारण शक्ति ने इसे बाजार हिस्सेदारी खोने के जोखिम के बगैर कीमत वृद्घि में सक्षम बनाया। हमें सिगरेट की एबिटा वृद्घि बरकरार रहने और आईटीसी के लिए निरंतर आय वृद्घि जारी रहने की संभावना है।' एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'आईटीसी बेहतर स्थिति में है, क्योंकि उसके व्यवसाय में 80 फीसदी मुनाफा सिगरेट खंड से आता है जिसमें कंपनी की 75-80 फीसदी की बाजार हिस्सेदारी है। हालांकि अन्य एफएमसीजी कंपनियां प्रतिस्पर्धा गहराने से प्रभावित होंगी।'
आईटीसी जैसी कंपनियों के लिए दूसरे तरह की संभावित लाभ भी हैं। भारत में तंबाकू के सेवन पर ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे के ताजा निष्कर्ष में कहा गया है कि महिला उपभोक्ता सिगरेट कंपनियों के लिए नए संभावित बाजार हो सकते हैं क्योंकि तंबाकू इस्तेमाल में तेजी या तो दैनिक आधार पर या धूम्रपान करने वालों की उम्र पर आधारित है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में धूम्रपान करने वालों का अनुपात ब्रिटेन, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में काफी कम (20 फीसदी से कम) है। एडलवाइस सिक्योरिटीज में विश्लेषक अबनीश रॉय कहते हैं, 'कई राज्यों (महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, बिहार, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश) में गुटका पर प्रतिबंध लगने से गैर-सिगरेट से सिगरेट पीने वालों (कुल तंबाकू इस्तेमाल का 15 फीसदी) में तब्दील होने से भी आईटीसी को मदद मिलेगी।'
आईटीसी के अन्य एफएमसीजी व्यवसाय (गैर-सिगरेट) के भी जल्द ही भरपाई की स्थिति में आ जाने की संभावना है, क्योंकि पैकेज्ड फूड (सेगमेंट का 60 फीसदी राजस्व) पहले ही मुनाफे की स्थिति में है और पर्सनल केयर का नुकसान घटेगा। सेगमेंट के एबिटा मार्जिन में नुकसान वित्त वर्ष 2006 के 16.9 फीसदी से घट कर वित्त वर्ष 2012 में 3.5 फीसदी रह गया और जून तिमाही में यह और घट कर 2.63 पर आ गया।
बाधाएं
वैश्विक तौर पर नियामक चिंताएं बढ़ रही हैं और आस्ट्रेलिया (प्लेन पैकेजिंग मानक 1 दिसंबर को लागू होने की संभावना), ब्रिटेन (करों में दो गुना तक की वृद्घि), कनाडा (स्वास्थ्य चेतावनियां) और रूस (वर्ष 2015 तक सालाना 40 फीसदी तक की कर वृद्घि) जैसे देशों में धूम्रपान पर सख्ती बढ़ी है। भारत में भी सिगरेट व्यवसाय के लिए कर परिदृश्य बाधक साबित हो रहा है जिससे अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों ने वैट में इजाफा किया है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का कहना है कि जब तक जीएसटी लागू नहीं हो जाता, तब तक वैट दरों में वृद्घि को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
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