| आईआरबी इन्फ्रा: मजबूत राह | | प्रिया कंसारा पंड्या / मुंबई September 16, 2012 | | | | |
आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स का परिदृश्य सेवा कर आयुक्त (सीएसटी) की ओर से 60.5 करोड़ रुपये के जुर्माने (देय कर का शत प्रतिशत) और वित्त वर्ष 2007-11 की अवधि के लिए तीन बीओटी परियोजना सहायक इकाइयों द्वारा लिए गए पथ कर पर देय सेवा कर पर ब्याज (सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित दरों पर) वसूले जाने संबंधी ऑर्डर मिलने के बावजूद मजबूत बना हुआ है। यदि समान तर्क उसकी सभी 10 परिचालन बीओटी परियोजनाओं पर लागू होता तो कुल देय कर समान अवधि के लिए 290 करोड़ रुपये बैठता है। जुर्माने और ब्याज को शामिल कर यह रकम कुल 600 करोड़ रुपये है जो सिटी रिसर्च में विश्लेषक दीपल डेलीवाला द्वारा अनुमानित नेटवर्क का 21 फीसदी है।
हालांकि आईआरबी ने कई तरह के आधार पर इस आदेश से बचाव किया है। पहला, उसका कहना है कि उसके एसपीवी एनएचएआई के एजेंट नहीं हैं, उन्हें बीओटी कंशेसनेर यानी रियायतग्राही के रूप में करार दिया है। दूसरा, वित्त मंत्रालय ने स्पष्टï किया है कि सड़कों के उपयोगकर्ताओं द्वारा चुकाए जाने वाले पथ-कर पर सेवा कर लागू नहीं है। इनमें वे सड़कें भी शामिल हैं जिन्हें एनएचएआई या सरकारी प्राधिकरण और रियायतग्राही के बीच समझौते के तहत गठित एसपीवी द्वारा निर्मित किया गया हो। टेक्नीकल शब्दों में कहें तो, टोल रोड कंपनियां सेवा कर के भुगतान के लिए निगेटिव लिस्ट में हैं। कंपनी ने अतीत के एक इसी तरह के मामले का हवाला दिया है जिसमें संबद्घ कंपनी (स्वामा टोलवे प्राइवेट) ने अपीलीय न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय में मामला जीता, हालांकि फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रही है।
आईआरबी अगले 90 दिनों के अंदर इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी और इस पर रोक लगाए जाने की भी मांग करेगी। हालांकि यह शेयर शुरू में गिर (128 रुपये के स्तर से) गया था, लेकिन अब यह 124 के स्तरों पर बना हुआ है। विश्लेषकों इसकी कम ही आशंका है कि कंपनी इस मामले में हार जाएगी।
सिटी रिसर्च की दीपल कहती हैं, 'हमारा मानना है कि उदाहरणों, मौजूदा प्रावधान, उद्योग पर प्रभाव को देखते हुए इस हालात में आईआरबी द्वारा मामले में हार की आशंका कम ही दिख रही है।' शेयरखान के एक विश्लेषक ने कहा, 'हमारा मानना है कि आईआरबी इन्फ्रा को ऐसे विपरीत हालात (कानूनी हार और एनएचएआई से मदद नहीं) का सामना नहीं करना पड़ेगा।'
कुल मिला कर, विश्लेषकों का मानना है कि इससे कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी वजह एनएचएआई और रियायतग्राही के बीच रियायत समझौता है जिससे एक ऐसा क्लॉज जुड़ा हुआ है जिसके तहत कानून या उसकी व्याख्या में बदलाव की स्थिति में कंपनी एनएचएआई/ सरकारी प्राधिकरण से रकम की वसूली में सक्षम होगी। इसके अलावा सेवा कर का भुगतान सेवा (इस मामले में एनएचएआई) के प्राप्तकर्ता द्वारा किया जाएगा।
विश्लेषकों ने 234 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ आईआरबी के शेयर पर 'खरीदारीÓ की रेटिंग को बरकरार रखा है। एमके के अजीत कहते हैं, 'हम नकदी प्रवाह अर्जित करने वाली परिचालन परिसंपत्तियों के आईआरबी के मजबूत पोर्टफोलियो और बैलेंस शीट की मजबूत स्थिति को लगातार पसंद करते रहे हैं। इससे कंपनी को परिसंपत्ति वृद्घि में मदद मिलेगी।'
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