| सरकार ने पकड़ी सुधारों की रफ्तार | |
| बीएस संवाददाता / नई दिल्ली/मुंबई 09 14, 2012 | | | | |
वित्तीय मदद की राह तक रहे देसी विमानन उद्योग को आखिरकार 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी मिल गई। देश के मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई को मंजूरी देने के अटके हुए फैसले पर भी कैबिनेट ने आज मुहर लगा दी। लेकिन इस पर अंतिम फैसला राज्यों को करना है। पिछले कई साल से इसी घोषणा का इंतजार कर रही वॉलमार्ट, कार्फू और टेस्को को इससे राहत मिली होगी। एफडीआई को अनुमति देने की सरकारी घोषणाएं महज इन्हीं क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं। सरकार ने डायरेक्ट टु होम जैसी प्रसारण सेवाओं में एफडीआई की अधिकतम सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने को मंजूरी दी। पावर एक्सचेंजों में भी 49 फीसदी एफडीआई को हरी झंडी मिल गई है। एफडीआई के लिए सरकार की उदारता का फायदा एकल ब्रांड खुदरा को भी मिला, जिसमें आइकिया की मांगों को ध्यान में रखते हुए इसे थोड़ा उदार बनाया गया है।
सहयोगी और विपक्षी दलों के विरोध के कारण विमानन और रिटेल में एफडीआई का मसला काफी लंबे समय से लटका हुआ था। नीतिगत मोर्चे पर छाई इस सुस्ती के कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देश ही नहीं विदेशी मीडिया की भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। लेकिन आज सरकार ने आर्थिक सुधारों को तेजी देने के मकसद से सहयोगियों के विरोध के बावजूद अभी तक लटके सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, 'सरकार के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। अगर इन कदमों से देश के आर्थिक विकास में सुधार होता है, तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की छवि अच्छी बनेगी और 2014 में होने वाले आम चुनावों में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ उतर सकता है।' अधिकारी ने कहा कि एफडीआई को लेकर हुई घोषणाओं से कम से कम मध्य वर्ग और विदेशी निवेशकों के बीच सरकार की छवि अच्छी बनेगी।
नवंबर 2011 में कैबिनेट ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई को अनुमति दी थी लेकिन राजनीतिक स्तर पर हुए विरोध के कारण उसे फैसला वापस लेना पड़ा था। इसलिए सरकार ने इसे लागू करने का फैसला राज्यों पर छोड़ दिया है।
फ्यूचर समूह के मुख्य कार्याधिकारी किशोर बियाणी ने कहा कि यह सहासिक फैसला है और इससे देश में एफडीआई और एफआईआई को बढ़ावा मिलेगा। बियाणी ने कहा, 'हमारे पास विभिन्न फॉर्मेट हैं और हमारे लिए विदेशी रिटेलरों को साथ लाने की कई संभावनाएं बन गई हैं।'
देसी विमानन उद्योग में विदेशी विमानन कंपनियों को अधिकतम 49 फीसदी निवेश की अनुमति देकर सरकार ने पिछले पांच साल से इस मसले पर छाई अनिश्चितता समाप्त कर दी। इस बारे में वाणिज्यिक मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि विमानन उद्योग में एफडीआई के नियम विमानन मंत्रालय तय करेगा। लेकिन सरकार ने शर्त रखी है कि कंपनी के दो-तिहाई निदेशक, मुख्य कार्याधिकारी, प्रबंध निदेशक भारतीय होने चाहिए।
हालांकि सरकार के ये सहासिक कदम उसके सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को रास नहीं आए हैं। बनर्जी सुरक्षा का हवाला देकर पहले ही विमानन उद्योग में एफडीआई का विरोध करती रही हैं। हालांकि नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने बनर्जी के साथ कई बार बैठक कर उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है।
प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि सरकार ने विदेशी दबाव में आकर मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को अनुमति दी है। भाजपा के प्रवक्ता और राज्य सभा में विपक्ष के उप नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा, 'भाजपा का वरिष्ठ नेतृत्व सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करता है। सहयोगी और विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद सरकार ने ये फैसले लिए हैं।' दिलचस्प है कि भाजपा की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने ही मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई पर चर्चा शुरू की थी लेकिन अब पार्टी ने इसका विरोध करने का फैसला किया है। इस मसले पर राजग बंटा हुआ है क्योंकि शिरोमणि अकाली दल इस फैसले के पक्ष में है जबकि जनता दल इसका विरोध कर रहा है। भाजपा का कहना है कि सरकार के इस फैसले से रिटेल क्षेत्र में काम करने वाले करीब 5 करोड़ लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
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