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महंगाई पर नियंत्रण रखना पहली प्राथमिकता: आरबीआई
बीएस संवाददाता / मुंबई September 14, 2012

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में दरें अपरिवर्तित रखने के संकेत दिए हैं। आरबीआई ने एक बार फिर कहा  है कि महंगाई पर नियंत्रण रखना उसकी पहली प्राथमिकता है।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने यहां एक कॉलेज में एक  सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, 'हम इस बात से सहमत हैं कि ब्याज दरें कम रहने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन दूसरी तरफ महंगाई भी कम होना जरूरी है। यही वजह है कि महंगाई पर नियंत्रण रखना पहली प्राथमिकता है।'
अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर 7.55 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई जो जुलाई में कम होकर 7 प्रतिशत से नीचे चली गई थी। केंद्रीय बैंक लगातार सरकार पर वित्तीय मजबूती लाने के लिए दबाव डालता रहा है और गुरुवार को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
चक्रवर्ती ने कहा, 'ब्याज दर अधिक रहने से बचत करने वालों को फायदा होता है। महंगाई की दर कुछ भी क्यों न हो बचतकर्ता को महंगाई से हमेशा अधिक प्रतिफल दिया जाना चाहिए और ऐसा होने पर ही हम बचत कर पाएंगे।' चक्रवर्ती ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तीसरी चरण की क्वांटीटिव ईजींग की घोषणा से जिंस की कीमतें ऊपर जा सकती हैं।
जिंस की कीमतें बढऩे से आरबीआई के लिए दरों में कमी करना आसान नहीं रह जाएगा। सोमवार को आरबीआई मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा करेगा और ऐसा माना जा रहा है कि रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाएंगे। गुरुवार को सरकार ने डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये की बढ़ोतरी की है, साथ ही प्रति परिवार रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या घटाकर 6 कर दी है।
31 जुलाई को मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में आरबीआई ने महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत और साल के लिए वृद्धि दर संशोधित कर 6.5 प्रतिशत कर दिया था। अप्रैल में ब्याज दर 50 आधार अंक कम करने के बाद अगली दो समीक्षा में दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था।
बैंकों की ओर से बड़े स्तर पर की जारी ऋण पुनर्संरचना पर चक्रवर्ती ने कहा कि ऐसा करना बुरा नहीं है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि  पहले वास्तविक  क्षेत्र में सुधार की जरूरत है और इसके बाद वित्तीय क्षेत्र में सुधारों की बारी आती है। चक्रवर्ती ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के सुधार को पृथक रख कर पूरा नहीं किया जा सकता है।

Keyword: RBI, monetory policy,
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