| विनिर्मित उत्पादों की महंगाई बढ़ी | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 14, 2012 | | | | |
अगस्त महीने में महंगाई की दर जून के 6.87 फीसदी के मुकाबले 0.68 फीसदी उछलकर 7.55 फीसदी पर जा पहुंची। इस बढ़ोतरी के बाद सोमवार को होने वाले आरबीआई के ऐलान के बाबत अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं की राय अलग-अलग हो गई है। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन महज 0.1 फीसदी बढ़ा, ऐसे में उम्मीद की जाने लगी कि आरबीआई निश्चित तौर पर नीतिगत दरों में कटौती करेगा।
अगस्त में खाद्य महंगाई जुलाई के 10.06 फीसदी के मुकाबले लुढ़ककर 9.14 फीसदी पर आ गई, लेकिन विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की दर 6.14 फीसदी पर पहुंच गई जबकि पहले यह 5.58 फीसदी थी। ऐसे में कुछ अर्थशास्त्रियों को लगता है कि आरबीआई नीतिगत दरों के मामले में यथास्थिति बनाए रखेगा। एक अन्य मुद्दा महंगाई की दरों में संशोधन का है। जून की महंगाई दर संशोधित कर 7.58 फीसदी कर दी गई है जबकि पहले यह 7.25 अनुमानित थी। ऐसे में स्पष्ट तौर पर यह महंगाई के ऊपर जाने का संकेत देता है। इसके अतिरिक्त तेल के मोर्चे पर सरकार की तरफ से गुरुवार को उठाए गए कदम से महंगाई में 1.5 फीसदी के इजाफे की संभावना है, जब कीमतों पर इसका पूरा असर दिख जाएगा।
खाने-पीने के सामानों पर नजर डालें तो गेहूं में अचानक 12.85 फीसदी की उछाल आई है जबकि पहले यह 6.67 फीसदी थी। लेकिन सब्जियों की कीमतें 9.98 फीसदी घटी हैं। अंडे, मांस और मछली के साथ-साथ दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी है।
विनिर्मित उत्पादों में हालांकि खाने-पीने की चीजों (प्रसंस्कृत) की महंगाई अगस्त के दौरान बढ़कर 9.01 फीसदी पर पहुंच गई जबकि पहले यह 6.25 फीसदी थी। इसमें सबसे ज्यादा योगदान चीनी का रहा, जो 7.91 फीसदी के मुकाबले उछलकर 16.15 फीसदी पर जा पहुंची। खाद्य तेल की महंगाई 10.37 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 10.47 फीसदी पर पहुंच गई।
यही वजह है कि कोर इन्फ्लेशन (गैर-खाद्य विनिर्मित उत्पादों) की दरें बढ़ी हैं, लेकिन उतनी ज्यादा नहीं। यह अगस्त में एक महीने पहले के 5.45 फीसदी के मुकाबले 5.58 फीसदी पर पहुंची हैं। र्ईंधन व बिजली की महंगाई 5.98 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 8.32 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने आधिकारिक आंकड़ों पर आश्चर्य जताया।
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