| तीन इस्पात शेयरों में कमजोरी के आसार | | जितेंद्र कुमार गुप्ता / September 10, 2012 | | | | |
लगभग एक सप्ताह में मेटल शेयरों में 6 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई जिनमें सेल और टाटा स्टील के शेयरों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा। विश्लेषकों ने कुछ इस्पात शेयरों की रेटिंग घटा दी है, क्योंकि उनका मानना है कि धीमी मांग और कीमत परिदृश्य की वजह से इन कंपनियों की आय पर दबाव पड़ सकता है। ऐंजल ब्रोकिंग में इस सेक्टर पर नजर रखने वाले भावेष चौहान कहते हैं, 'यूरोजोन ऋण संकट, धीमी घरेलू मांग, घटती कीमतों, बढ़ती उत्पादन लागत, कोयले पर कैग रिपोर्ट और खदानों के लिए प्रक्रियागत मंजूरी में विलंब आदि की वजह से पिछले 6 महीनों के दौरान मेटल शेयरों पर दबाव पड़ा है।'
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के संजय जैन ने इस सेक्टर पर अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा, 'भारतीय इस्पात कंपनियों के शेयर अभी भी महंगे मूल्यांकन पर हैं, हालांकि वैश्विक रूप से इस्पात शेयरों की रेटिंग में कमी आई है। हमारे विश्लेषण के अनुसार सकारात्मक प्रतिफल (12 महीनों के दौरान) की संभावना टाटा स्टील में 9 में से, सेल में 3 में से 1 और जेएसडब्ल्यू स्टील में 9 में से 1 है।'
प्रमुख चिंता
वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से यूरोप, अमेरिका और खासकर चीन समेत प्रमुख बाजारों में इस्पात मांग सुस्त पड़ी है। दरअसल, चीनी बाजारों में हालात 2008-09 के संकट के बाद से खराब समझे जा रहे हैं, क्योंकि अर्थव्यवस्था की गति मंद बनी हुई है। चीनी बाजार मेटल का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वैश्विक इस्पात उत्पादन वृद्घि घट कर हाल के महीनों में सिर्फ 1-2 फीसदी रह गई है और क्षमता इस्तेमाल लगभग 79 फीसदी पर है जो ऐतिहासिक दृष्टि से काफी
कम है।
एक साल पहले तक लगभग 10-12 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही घरेलू इस्पात की मांग जुलाई 2012 में महज 4.7 फीसदी तक बढ़ी है। रेटिंग एजेंसी फिच ने इस्पात उत्पादकों के लिए अपने दृष्टिकोण में कहा है कि इस्पात मांग में वृद्घि वर्ष 2012 के बाकी महीनों के लिए 6-7 फीसदी के दायरे में रहने की संभावना है। कंपनियां हाल के महीनों में उत्पादन में कटौती कर चुकी हैं। इस्पात मांग के लिए परिदृश्य अल्पावधि में धीमा बने रहने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय
दोनों बाजारों में कीमतों पर दबाव पड़ा है।
यूरोप में इस्पात कीमतें मई 2012 में 550 डॉलर प्रति टन से घट कर फिलहाल लगभग 490 डॉलर प्रति टन पर आ चुकी हैं। इसी तरह चीनी इस्पात कीमतें अप्रैल और मई के लगभग 680 डॉलर प्रति टन से घट कर 560 डॉलर प्रति टन पर आ गई हैं। भारत में भी इसी तरह का रुझान बना हुआ है, क्योंकि इस्पात कीमतें मई 2012 के बाद से लगभग 10-12 फीसदी तक घटी हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषक ने वित्त वर्ष 2013 की पहली तिमाही की अपनी समीक्षा में लिखा है, 'इस्पात कीमतों में बड़ी गिरावट जून और जुलाई में दर्ज की गई और इससे वित्त वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में आय पर असर दिखेगा। परिचालन लागत पूरे क्षेत्र में बढ़ रही है।'
शीर्ष-3 कंपनियां
खासकर चीन में कम उत्पादन की वजह से अंतरराष्ट्रीय कुकिंग कोयले और लौह अयस्क की कीमतें गिरी हैं। कच्चे माल की मांग में चीन का योगदान लगभग 60 फीसदी रहा है। इसकी कुछ भरपाई रुपये में गिरावट से होगी। इसलिए विश्लेषक जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी गैर-समेकित कंपनियों के लिए मौजूदा हालात को कुछ हद तक सकारात्मक करार दे रहे हैं। हालांकि हालात कंपनी के लिए अभी भी अनुकूल नहीं हैं। यह न सिर्फ इस सेक्टर के कमजोर परिदृश्य की वजह से नहीं है बल्कि विश्लेषकों ने जेएसडब्ल्यू इस्पात के जेएसडब्ल्यू स्टील के साथ विलय के बाद इस शेयर की रेटिंग में भी कमी की है।
वहीं कच्चे माल की कीमतों में गिरावट टाटा स्टील के घरेलू व्यवसाय के लिए भी अच्छी खबर नहीं है। इस्पात कीमतों और मांग में नरमी से टाटा स्टील का वैश्विक परिचालन भी प्रभावित होगा। निर्मल बांग सिक्योरिटीज में इस सेक्टर पर नजर रखने वाले गिरिराज डागा कहते हैं, 'हालांकि हम पूरे क्षेत्र पर नकारात्मक रुख नजरिया अपनाए हुए हैं, लेकिन इस क्षेत्र में सबसे अधिक नाजुक स्थिति में टाटा स्टील (यूरोपीय बाजारों में अपने व्यवसाय के संदर्भ में) होगी।'
टाटा स्टील के यूरोपीय परिचालन की भागीदारी कुल कारोबार में 65 फीसदी की है और अब इसमें नरमी आई है। विश्लेषकों ने हाल में इस कंपनी के लिए अपने अनुमानों में कटौती की है, क्योंकि उनका मानना है कि कीमतें घटने की वजह से प्राप्तियों में गिरावट आएगी, जबकि मांग में कमी आने से कारोबार प्रभावित होगा।
सेल का शेयर पसंद के लिहाज से बेहतर विकल्प होगा, लेकिन धीमी घरेलू मांग और इस्पात कीमतों में गिरावट की वजह से इस कंपनी को भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, पहली तिमाही में सेल ने 30 लाख टन इस्पात का उत्पादन किया और वह सिर्फ 25 लाख की बिक्री करने में सफल रही।
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