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'दवाओं के कच्चे माल के स्रोत पर है हमारी नजर'
इंजेक्शन दवा बनाने वाली अमेरिकी कंपनी हॉस्पिरा इंक ने 2010 में 40 करोड़ डॉलर के एक सौदे के तहत ऑर्किड केमिकल्स ऐंड फार्मास्युटिकल्स से बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक्स कारोबार के अधिग्रहण के साथ भारत में कदम रखा था। कंपनी अब 20 करोड़ डॉलर में ऑर्किड फार्मा के संयंत्रों के अधिग्रहण की घोषणा के साथ ही दोबारा चर्चा में आ गई है। हॉस्पिरा हेल्थकेयर इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. सी भक्तवत्सल राव ने गिरीश बाबू के साथ विस्तृत बातचीत की। मुख्य अंश: /  September 05, 2012

ऑर्किड फार्मा के संयंत्रों का ताजा अधिग्रहण हॉस्पिरा के लिए कितना महत्त्वपूर्ण है?
हॉस्पिरा के पास पहले एक एंटीबायोटिक फ्रैंचाइजी थी। लेकिन 2010 में ऑर्किड के संयंत्र के अधिग्रहण के बाद हमारे इस पोर्टफोलियों में विस्तार हुआ। हमारी भारतीय इकाई तीन क्षेत्रों- सेफालॉस्पोरिन्स, पेनिसिलिन्स और कार्बापेनेम्स में कारेाबार करती है। पिछले दो वर्षों से इन क्षेत्रों में हम अपने प्रदर्शन में धीरे-धीरे सुधार ला रहे हैं। इंजेक्शन जीवन रक्षक दवाएं होती हैं और हम इस क्षेत्र में मौजूद हैं। जहां तक टर्नओवर का सवाल है तो वैश्विक स्तर पर इसमें सुधार हुआ है। लेकिन अभी हमें तीन-चार चीजों पर ध्यान देना होगा। हम पेनिसिलिन्स और कार्बापेनेम्स के लिए कच्चे माल की आपूर्ति ऑर्किड से करने के बाद अपने चेन्नई के इरुंगाट्टुकोट्टेई संयंत्र में दवाओं का उत्पादन करते हैं। इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी हासिल करते हुए हमारी नजर रोगियों की देखभाल क्षेत्र पर है। इस प्रकार औरंगाबाद संयंत्र की भूमिका हमारे लिए काफी महत्त्वपूर्ण साबित होगी और यह रणनीतिक रूप से हमारे लिए बिल्कुल अनुकूल है। इस अधिग्रहण के बल पर हम लगातार आपूर्ति को सुनिश्चित कर सकेंगे। साथ ही इससे हमें लागत बचाने और उत्पादन कुशलता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
इस अधिग्रहण से हमें भविष्य के लिए एक एपीआई प्लेटफॉर्म मिलेगा।

अपनी घोषणा में हॉस्पिरा ने कहा है कि इस अधिग्रहण से कंपनी को आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। आपकी टिप्पणी?
औरंगाबाद संयंत्र बेहतरीन प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता और मानकों के साथ अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र है। चेन्नई के आरऐंडडी संयंत्र, जो इस अधिग्रहण का हिस्सा है, से हमें लागत बचाने में मदद मिलेगी, विशेषकर कार्बापेनेम और पेनिसिलिन उत्पाद समूहों में, जिसका हमारे निर्यात कारोबार में करीब 80 से 85 फीसदी का योगदान है। इसलिए औरंगाबाद संयंत्र हमारे लिए रणनीति रूप से काफी महत्त्वपूर्ण है। हॉस्पिरा कच्चे माल की लगातार आपूर्ति को भी सुनिश्चित करना चाहती है। हमारी नजर कुछ उत्पादों के कच्चे माल के स्रोत पर है ताकि उत्पादन किसी भी तरह से प्रभावित न हो।

क्या आपको लगता है कि हॉस्पिरा की जरूरतों और ऑर्किड के कारोबार में एक प्रकार का तालमेल है?
इंजेक्शन क्षेत्र में प्रौद्योगिकी संबंधी बड़ी-बड़ी बाधाएं हैं। जबकि इस क्षेत्र में ऑर्किड की क्षमता काफी अधिक है विशेषकर बांझपन एपीआई के संदर्भ में। बाजार में भी इस क्षेत्र के लिए तमाम तरह की नियामकीय जरूरतें हैं। इस क्षेत्र के लिए ऑर्किड ने उच्च गुणवत्तायुक्त एपीआई के साथ पर्याप्त क्षमता विकसित की है।

भारत में आपने जाइडस कैडिला के साथ भी करार किया है। करार संबंधी आगे की क्या रणनीति है?
कैडिला के साथ संयुक्त उद्यम को 2005 में मायने फार्मा और जायडस कैडिला के साथ करार के बाद स्थापित किया गया था। हॉस्पिरा ने 2007 में जब मायने फार्मा का अधिग्रहण किया तो यह संयुक्त उद्यम भी उसके पास चली गई। इस संयंत्र में हॉस्पिरा के लिए ऑन्कोलॉजी दवाओं का उत्पादन होता है।

भविष्य में भारत में अधिग्रहण संबंधी कोई योजना?
फिलहाल इस पर कुछ भी टिप्पणी करना मुनासिब नहीं होगा। हाल के दिनों में विस्तार के बाद आज हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां कारेाबार के सुदृढ़ीकरण के बाद ही विस्तार के बारे में सोचना चाहिए। फिलहाल हम देश में अपने कारोबार को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

Keyword: companies, market, business,,
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