अकाली दल के वरिष्ठ नेता ने कहा, इस तरह के अव्यवहारिक कदम उठाने से पहले संप्रग सरकार के नेताओं को अपने अंतर्मन में झांक लेना चाहिए कि कैसे उन्होंने कृषि उपज की लागत बढ़ाकर राज्य के किसानों को बरबादी की कगार पर ला खड़ा किया है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने गुरूवार को कई फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया, लेकिन गेहूं को इससे अलग रखा और कहा कि इस संबंध में विचार विमर्श के बाद फैसला किया जाएगा।
बादल ने कहा कि संप्रग नेताओं को किसानों को इस बात का जवाब देना होगा कि 2004 से शुरू हुए अपने शासनकाल में उन्होंने डीजल और उर्वरक के दामों में कितनी बढ़ोतरी की है।