डिवीज लैबोरेटरीज के शेयरों ने मौजूदा वित्त वर्ष में 46 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है। वैश्विक मंदी बरकरार है और ऐसे में शोध गतिविधियां घटने की आशंका जताई जा रही है, मगर इसके बावजूद कम लागत वाले उत्पादन मॉडल और ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध की वजह से कंपनी का राजस्व और मुनाफा बढ़ा है। रुपये की कमजोरी से भी कंपनी के प्रदर्शन को बल मिला है क्योंकि उसे 90 फीसदी राजस्व निर्यात से हासिल होता है।
आने वाले समय में भी डिवीज के लिए बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं। सभी सेगमेंट्स में बढिय़ा कारोबार हो रहा है। विशाखापत्तनम सेज से राजस्व और मुनाफे के और बढऩे की उम्मीद है। कंपनी पर फिलहाल ऊंचे कर का बोझ है, मगर सेज (यहां कर छूट का लाभ मिल रहा है) से बढ़े हुए उत्पादन के दम पर इसकी कुछ भरपाई हो रही है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर विश्लेषक (34 में से 32) ने शेयरों के लिए खरीद का सुझाव दिया है और 11 से 18 फीसदी की तेजी के साथ 1,250 से 1,325 रुपये का लक्ष्य तय किया है।
हर सेगमेंट में विकास, बढिय़ा मार्जिन
सभी सेगमेंट में विकास के दम पर डिवीज का राजस्व 29.7 फीसदी बढ़ा है। कॉन्ट्रैक्ट शोध और विनिर्माण (क्रैम्स) कारोबार से 22.25 फीसदी की दर से 214.8 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है। हालांकि जेनरिक्स का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा और बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 38 फीसदी बढ़कर 237.7 करोड़ रुपये रही। यहां तक की नए न्यूट्राक्यूटिकल सेगमेंट में भी 50 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई (इसका आधार छोटा है)। डिवीज ने मार्जिन के मोर्चे पर भी बाजार को आश्चर्यचकित किया है। जून तिमाही लगातार दूसरी ऐसी तिमाही है जब एबिटा मार्जिन 40 फीसदी के स्तर पर रहा है जबकि इससे पहले की तिमाहियों में यह 35 फीसदी से ऊपर था। जून तिमाही के लिए भी विश्लेषकों ने एबिटा मार्जिन 35 से 36 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया था। मजबूत मूल्य निर्धारण ताकत और अधिक मार्जिन वाले प्रोडक्ट मिक्स की वजह से कंपनी की मार्जिन वृद्घि में मदद मिली है। रुपये की कमजोरी से भी इस पर अनुकूल असर पड़ा है।
कर दरें घटने की उम्मीद
जून तिमाही के दौरान कर देनदारी में 72 फीसदी का इजाफा हुआ। वित्त वर्ष 2012 से ही कर दरें ऊंची रही हैं। विश्लेषकों के मुताबिक दिवि के लिए कर दरें वित्त वर्ष 2011 में 9.1 फीसदी थी जो वित्त वर्ष 2012 में बढ़कर 21.7 फीसदी हो गई। निर्यात आधारित इकाइयों के लिए कर छूट खत्म होने की वजह से कर दरों में इजाफा हुआ है। जून 2012 तिमाही में कर की दरें 25.5 फीसदी थीं। हालांकि विशाखापत्तनम सेज में उत्पादन बढऩे से अगले दो साल के दौरान कर दरों में बदलाव आने की उम्मीद है।
आगे की संभावनाएं
वित्त वर्ष 2012 के आखिर में दिवि का उपभोक्ता आधार बढ़कर 300 से भी ऊपर चला गया है। इसमें कंपनी के सभी कारोबार शामिल हैं। यह एक सकारात्मक पहलू है क्योंकि बढ़े हुए उपभोक्ता आधार से ऑर्डरों में तेजी कंपनी को अपना राजस्व विकास बनाने में मदद करेगी और साथ ही बिक्री को जोखिम भी कम हो जाएगा। असके अलावा विशाखापत्तनम सेज की दूसरी इकाई को जून से जुलाई 2012 के बीच 3 सीजीएमपी जांच के दायरे से गुजरना पड़ा है। इसमें टीजीए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिकी एफडीए शामिल है। विश्लेषकों का कहना है कि अब तक किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं जताई गई है और ऐसे में निष्कर्ष भी सकारात्मक रहने की उम्मीद है। कार्वी के विश्लेषकों का मानना है कि सेज को सफलतापूर्वक पूरा करने से कंपनी के पास नियमित बाजार के लिए उत्पादन और राजस्व बनाए रखने का मौका होगा।
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