कोल इंडिया: अच्छा प्रदर्शन, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
उज्ज्वल जौहरी / August 19, 2012
कोल इंडिया का शेयर जून तिमाही के लिए आशाजनक प्रदर्शन दर्ज करने के बाद 1.64 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। कंपनी का राजस्व 14 फीसदी जबकि मुनाफा सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़ा है। इस शेयर के लिए विद्युत उत्पादकों के साथ ईंधन आपूर्ति समझौतों (एफएसए) में पेनाल्टी क्लॉज में बदलाव से जुड़ी खबरें बेहद अहम हैं। हालांकि प्रस्तावित बदलाव सकारात्मक हैं, पर बाजार अभी आयातित कोयले (कम आपूर्ति की स्थिति में अंतर को पाटने) के लिए कोल इंडिया और विद्युत उत्पादकों के बीच प्राइस पूलिंग को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आयातित कोयले की ऊंची लागत विद्युत उत्पादकों द्वारा वहन की जाएगी और इस संबंध में कोई भी विपरीत स्थिति कोल इंडिया के मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकती है।
इसके अलावा वित्त वर्ष 2013 के अनुमानों को पूरा किए जाने के लिए सितंबर 2012 की तिमाही के दौरान उत्पादन और लदान (डिस्पैच) अहम होंगे। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चालू वर्ष के पहले चार महीनों में उत्पादन की रफ्तार को देखते हुए वित्त वर्ष 2013 के उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले कुछ कमी देखी जा सकती है। फिलहाल विश्लेषकों का मानना है कि कोल इंडिया लक्ष्य को हासिल कर लेगी। इसे देखते हुए ज्यादातर विश्लेषक इस शेयर पर सकारात्मक हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार आम सहमति के आधार पर कीमत लक्ष्य 385 रुपये पर है जो 353 रुपये के मौजूदा स्तर से 9 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत है।
लदान में तेजी
जून 2012 की तिमाही के दौरान रेलवे रेक (कोयला आपूर्ति के लिए डिब्बे) की बढ़ती उपलब्धता से कोल इंडिया की लदान में तेजी आई। रेलवे रेक की उपलब्धता जून तिमाही में बढ़ कर 177 रेक प्रतिदिन रही जो जून 2011 की तिमाही में 164 रेक प्रति दिन थी। वहीं रेलवे के जरिये उठाव में 11.2 फीसदी (सालाना आधार पर कुल उठाव 6.4 फीसदी की वृद्घि के साथ 11.304 करोड़ टन रहा) का इजाफा हुआ। जून 2012 की तिमाही के लिए उत्पादन 10.247 करोड़ टन (एमटी) रहा जो सालाना आधार पर 6.4 फीसदी अधिक है।
दूसरी तिमाही पर नजर
पिछली दो तिमाहियों में कोल इंडिया के संयुक्त उत्पादन (24.707 करोड़ टन) और लदान (23.587 करोड़ टन) से संकेत मिलता है कि कंपनी ऊंची दर पर डिस्पैच को बरकरार रखने के लिए इन्वेंट्री से लैस है। इस संदर्भ में कोल इंडिया जुलाई के दौरान 3.62 करोड़ टन की लदान में सफल रही, हालांकि उत्पादन 3.18 करोड़ टन रहा जो 3.23 करोड़ टन के उत्पादन लक्ष्य की तुलना में कम है। इससे कुछ हद तक चिंता पैदा हुई है। हालांकि दाइवा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि उत्पादन वृद्घि में कुल गिरावट कुछ सहायक इकाइयों में अस्थायी समस्याओं की वजह से आई है और आने वाले महीनों में यह वृद्घि सामान्य रहनी चाहिए। सितंबर तिमाही के लिए कंपनी ने 9.6 करोड़ टन के उत्पादन और 10.7 करोड़ टन की लदान का लक्ष्य रखा है।
संशोधित एफएसए
1.5 फीसदी की बेस पेनाल्टी और 40 फीसदी (50 फीसदी से कम आपूर्ति) की पीक पेनाल्टी के लिए विद्युत उत्पादकों के साथ एफएसए के लिए संशोधित पेनाल्टी क्लॉज का शेयर बाजार ने स्वागत किया है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि यह पूर्व के प्रस्तावों की तुलना में काफी बेहतर है। इसके अलावा प्रतिबद्घता और अपने स्वयं के उत्पादन के बीच किसी अंतर को पाटने के लिए कोयले के आयात का भी विकल्प है जिसे देखते हुए भी कोल इंडिया पर पेनाल्टी का अधिक प्रभाव पडऩे की आशंका नहीं दिख रही है।
हालांकि प्राइस पूलिंग पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है। आमतौर पर यह माना जा रहा है कि विद्युत उत्पादक आयात की वृद्घिशील लागत को वहन करेंगे। हालांकि कोल इंडिया के मामले में वृद्घिशील लागत को साझा किए जाने से इसका मार्जिन प्रभावित हो सकता है।
पहली तिमाही
जून तिमाही में लागत नियंत्रण उपायों से कंपनी को परिचालन मुनाफा मार्जिन में मदद मिली, हालांकि 6130 करोड़ रुपये पर कर्मचारी लागत सालाना आधार पर 26 फीसदी अधिक रही। तिमाही आधार पर कर्मचारी लागत में 33 फीसदी की कमी आई। इसके अलावा संयुक्त रूप से संविदात्मक, विविध और ओवरबर्डन रिमूवल खर्च 1719 करोड़ रुपये (तिमाही आधार पर 40 फीसदी की कमी) तक घटा जिससे एबिटा मार्जिन 29.2 फीसदी बढ़ा जो मार्च की तिमाही में 19.5 फीसदी पर था।
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