| कर्ज नहीं तो बैंकों से लेनदेन नहीं | | बीएस संवाददाता / पटना August 17, 2012 | | | | |
बिहार में कर्ज बांटने में आना-कानी करने वाले सरकारी बैंकों पर राज्य सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों में अपने खाते बंद करने जा रही है। यह पैसा बिहार सरकार अब उन बैंकों में रखेगी, जिन्होंने राज्य में ज्यादा कर्ज बांटा है।
राज्य के उप-मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, 'बिहार तेजी से तरक्की कर रहे राज्यों में से है। हालांकि अब भी कई बैंक राज्य में कर्ज देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे राज्य के आर्थिक विकास में दिक्कतें आ रही हैं। इसीलिए हमने कर्ज देने के मामले में खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को दंडित करने की योजना शुरू की है। इससे पहले भी हम निजी बैंकों में अपने खाते बंद कर चुके हैं।'
उन्होंने बताया, 'इसके लिए हमने कृषि ऋण, कर्ज-जमा अनुपात (सीडी रेश्यो), किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज को पैमाना बनाया है। जो बैंक इन सभी पैमानों पर जितना अच्छा प्रदर्शन करेंगे, राज्य सरकार उनमें उतनी ज्यादा रकम रखेगी। दूसरी तरफ, खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों से हम अपनी रकम निकाल लेंगे। इस योजना की शुरुआत हमने कर दी है। बैंकों के प्रदर्शन के बारे में हम अगले 4-5 दिनों में घोषणा भी करेंगे।'
मोदी ने बताया, 'हमने सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों की पहचान की है। इनके नाम का ऐलान कुछ दिनों में किया जाएगा। हम अब इन बैंकों से अपनी रकम निकाल लेंगे। अगर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार लाया, तो राज्य सरकार वापस उनमें लेन-देन शुरू कर सकती है।'
राज्य के वित्त विभाग के सचिव मिहिर कुमार ने बताया, 'बैंकों के प्रदर्शन पर हमारी पूरी नजर है। हम इस बारे में अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार के सभी विभागों और निगमों को पत्र लिखने वाले हैं। हम उनसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंकों में ही पैसा रखने को कहेंगे। हमारा मकसद राज्य में बैंकों को ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने को प्रोत्साहित करना है।' इससे पहले बीते साल एक ऐसे कदम के तहत राज्य सरकार निजी बैंकों में अपने खाते बंद कर चुकी है। हालांकि मोदी ने कहा, 'कुछ निजी बैंकों ने भी कर्ज के वितरण के मामले में अच्छा काम किया है। हम उनके साथ कारोबार फिर से शुरू कर सकते हैं।' इस वित्त वर्ष में बैंकों ने बिहार में 51,400 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित करने की योजना बनाई है।
प्रत्येक परिवार का खुलेगा बैंक खाता
मोदी ने कहा कि राज्य में इस वित्त वर्ष में प्रत्येक परिवार का कम से कम एक बैंक खाता खोला जाएगा और राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली 35 योजनाओं का क्रियान्वयन इन खातों के माध्यम से होगा। मोदी ने कहा, 'चालू वित्त वर्ष में प्रत्येक परिवार का कम से कम एक बैंक खाता अवश्य खोला जाएगा। राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली 35 योजनाओं का क्रियान्वयन इन बैंक खातों के माध्यम से किया जाएगा।' मोदी ने कहा, 'राज्य में बैंकिंग सेवाओं के व्यापक विस्तार के लिए वित्त वर्ष के दौरान 14 हजार से अधिक बैंकिंग केंद्र शुरू किए जाएंगे। इन 14 हजार केंद्रों में बैंक शाखाएं, अति लघु शाखाएं और बैंक सुविधाएं प्रदान करने वाले बैंक प्रतिनिधि (बैंकिंग कारेस्पोंडेंट) सभी शामिल हैं।' मोदी ने बताया, 'राज्य में 50 हजार रुपये तक का कृषि ऋण लेने के लिए अब भू-स्वामित्व प्रमाणपत्र (एलपीसी) और एक लाख रुपये तक का कर्ज लेने पर कुछ गिरवी रखने की दरकार नहीं पड़ेगी।'
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