आवासीय संपत्ति की बिक्री से प्राप्त रकम अगर चरणबद्ध तरीके से दूसरी जायदाद में निवेश की जाती है तो वह आयकर धारा 54 के तहत लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर से मुक्त होगी। हालांकि हाल में ही बंबई उच्च न्यायालय में आयकर ट्राइब्यूनल का एक मामला उठा जिसमें न्यायालय ने पूछा कि अगर एक से अधिक मकान की बिक्री होती है और इनकी बिक्री से प्राप्त रकम का इस्तेमाल नई जायदाद में होता है तो क्या उस स्थिति में भी लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ की छूट उपलब्ध होगी। आइए इस मामले की पृष्ठभूमि में जाएं।
एक व्यक्ति ने अपने तीन भाइयों के साथ दो अलग-अलग इमारतों में दो फ्लैट खरीदे थे। पहला फ्लैट वित्त वर्ष 1983-84 में खरीदा गया था जबकि दूसरे की खरीदारी वित्त वर्ष 81-82 में हुई थी। दोनों फ्लैट में करदाता की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। एक फ्लैट की बिक्री वित्त वर्ष 96-97 में हुई थी जबकि दूसरा फ्लैट वित्त वर्ष 97-98 में बेचा गया था। करदाता ने दोनों फ्लैट में अपनी हिस्सेदारी को एक मानते हुए लंबी अवधि के पूंजीगत कर लाभ की गणना की थी और इनसे प्राप्त रकम एक आवासीय परिसंपत्ति के निर्माण में लगाई थी। बाकी बची रकम का भुगतान कर के रूप में कि या गया।
करदाता ने समीक्षा अधिकारी को बताया कि हालांकि दोनों फ्लैट आस-पास ही थे और इनका इस्तेमाल एक मकान के तौर पर होता रहा है। लिहाजा करदाता की ओर से कहा गया कि इन्हें एक ही आवासीय परिसंपत्ति माना जाए। समीक्षा अधिकारी इससे सहमत नहीं हुआ। अधिकारी ने पाया कि दोनों फ्लैट अलग-अलग इमारतों में थे इसलिए इन्हें एक परिसंपत्ति के तौर पर नहीं माना जा सकता है। अधिकारी ने यह भी पाया कि धारा 54 के तहत आवासीय परिसंपत्तियों के संदर्भ में छूट का लाभ दिया गया। इन आवासीय परिसंपत्तियों से प्राप्त आय 'आवासीय परिसंपत्ति से प्राप्त आय' के तहत कराधान के योग्य थी।
इस मामले में करदाता के पास दो आवासीय मकान थे और आवास परिसंपत्ति से प्राप्त आय से छूट सेल्फ ऑक्युपाइड मकान के लिए उपलब्ध थी। लिहाजा दूसरी आवास परिसंपत्ति को छोड़ दिया गया।
लेकिन करदाता ने टैक्स रिटर्न में इसकी घोषणा नहीं की थी इसलिए यह माना गया कि इसके पीछे एक ही कारण था और वह था कि करदाता ने फ्लैट का इस्तेमाल कारोबार के मकसद से किया था।
अधिकारी ने पाया कि चूंकि, दूसरे फ्लैट का इस्तेमाल कारोबार के उद्देश्य से हुआ था, इससे प्राप्त आय पर एक इकाई के तौर पर कर नहीं लगता और धारा 54 के तहत इसके तहत कर छूट का लाभ उपलब्ध नहीं है।
करदाता ने समीक्षा अधिकारी के इस फैसले के खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) या सीआईटी (ए) के सामने अपील की। करदाता का पक्ष सुनने के बाद सीआईटी (ए) ने पाया कि हालांकि दोनों फ्लैट एक जगह नहीं थे लेकिन वे एक ही मकान के हिस्से थे इसलिए इन दोनों फ्लैट को एक जायदाद के तौर पर माना जाना चाहिए। सीआईटी ने यह भी पाया कि समीक्षा अधिकारी का एक फ्लैट को कारोबारी परिसंपत्ति के रूप में देखना सहीं नही था। इसके बाद राजस्व विभाग ने भी ट्राइब्यूनल में अपील दायर की। ट्राइब्यूनल सीआईटी (ए) के विचार से सहमत नहीं हुआ। फ्लैट दो विभिन्न इमारतों और दो विभिन्न हाउसिंग सोसाइटी में थे और इनकी खरीदारी भी दो अलग-अलग साल में हुई थी। दोनों बिल्डिंग में जाने के लिए कोई साझा रास्ता भी नहीं था। लिहाजा इन दोनों फ्लैट को एक नहीं माना जा सकता है।
ट्राइब्यूनल का मानना था कि इसकी समीक्षा की जानी जरूरी है कि करदाता एक से अधिक मकानों की बिक्री की स्थिति में धारा 54 के तहत करों में छूट का हकदार है या नहीं। ट्राइब्यूनल ने पाया कि धारा 54 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जिस वजह से एक मकान की बिक्री के मामले में कर से राहत की अनुमति नहीं दी गई। अगर करदाता एक ही साल में में दो आवासीय परिसंपतियों की बिक्री करता है और पूंजीगत लाभ का निवेश एक नई जायदाद में होता है तो धारा के तहत दूसरी शर्तों को पूरा करने पर छूट का दावा खारिज नहीं किया जा सकता है। धारा 54 के प्रावधानों के तहत करदाता कितनी भी संख्या में आवासीय परिसंपत्ति का हस्तांरण कर सकते हैं, बशर्ते पूंजीगत लाभ का निवेश एक नए मकान में एक तय सीमा के तहत किया जाना चाहिए। लिहाजा पहले से एक पाबंदी है कि एक आवास परिसंपत्ति से प्राप्त पूंजीगत लाभ का इस्तेमाल एक से अधिक आवासीय परिसंपत्ति में नहीं किया जा सकता है। हालांकि इस बात को लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है कि एक से अधिक मकानों की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ का इस्तेमाल एक नए मकान में निवेश के लिए नहीं किया जा सकता। जब तक एक मकान की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ का इस्तेमाल हरेक मामले में एक नए मकान में किया जाता है तब तक छूट का लाभ मिलेगा। अगर दो फ्लैटों की बिक्री अलग-अलग साल में होती है तब भी छूट का लाभ मिलेगा बशर्ते नए मकान का निर्माण/खरीद की समय सीमा हरेक मामले में पूरी की जाती है।
समीक्षा अधिकारी का तर्क धारा 54 के तहत करों में छूट के योग्य नहीं था क्योंकि इसे कारोबार के मकसद से किया गया इस्तेमाल नहीं माना जाएगा। समीक्षा अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि करदाता ने फ्लैट से प्राप्त कोई आय नहीं लौटाई थी। सीआईटी (ए) ने इस तथ्य को स्वीकार नहीं किया और ट्राइब्यूनल सीआईटी (ए) के तथ्यों से सहमत रहा।
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