| एकमुश्त निपटान होगा बंद | | अभिजित लेले / मुंबई August 07, 2012 | | | | |
उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने की वजह से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए फंसे कर्ज की एकमुश्त निपटान (वन टाइम सेटलमेंट, ओटीएस) योजना को बंद करने जा रहा है। एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह योजना उद्यमियों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाई और पुनर्भुगतान क्षमता पर दबाव है जिससे पुराने खातों को बंद करने में दिक्कत आ रही है।
मार्च 2012 के अंत में एसबीआई की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) लगभग 39,676 करोड़ रुपये थीं। इसमें एसएमई की भागीदारी 11,929 करोड़ रुपये (30.1 फीसदी) थी। कुल एसएमई पोर्टफोलियो मार्च 2012 के अंत में 1,39,175 करोड़ रुपये था। इस योजना के तहत संबद्घ लोगों को एक साल के अंदर कुल बकाया के निपटान हेतु लिए गए ऋण का 5 फीसदी अग्रिम तौर पर चुकाना होगा। यह ऋण खातों को रिकवर एवं सेटल किए जाने की कोशिशों का हिस्सा है।
तेज अदायगी के लिए यह स्कीम ओटीएस पर 15 फीसदी और 10 फीसदी का इंसेंटिव प्रदान करती है। यह उन कर्जदारों को दी जाती है जो ओटीएस की मंजूरी की तारीख से एक महीने और तीन महीने के अंदर पूरा भुगतान करते हैं। एसबीआई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्त अधिकारी दिवाकर गुप्ता का कहना है कि छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए मौजूदा आर्थिक मंदी में मुनाफा बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है। उनकी उत्पादन लागत में इजाफा हो रहा है। जून में देश के इस सबसे बड़े ऋणदाता ने पुनर्भुगतान के दबाव को कम करने के लिए सभी ऋण श्रेणियों में उधारी दरों में कटौती की। ब्याज दरों में कुल कटौती सभी कर्ज श्रेणियों के लिए 50 आधार अंक से 350 आधार अंकों के दायरे में रही। इसने ऋण गारंटी योजना के तहत एसएमई कर्जदारों के लिए एक अलग दर ढांचा पेश किया था। गारंटी कवर प्राप्त करने और इस श्रेणी के लिए कर्ज प्रवाह में वृद्घि सुनिश्चित करने के लिए एसएमई कर्जदारों को प्रोत्साहित किए जाने के लिए यह एक करोड़ रुपये तक की कर्ज सीमा पर लागू है।
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