| अब स्टैंडर्ड चार्टर्ड पर उठी उंगली | | एजेंसियां / मुंबई August 07, 2012 | | | | |
महज एक महीने से भी कम अवधि में भारत में उपलब्ध कराई जा रही विदेशी बैंक की आउटसोर्सिंग सेवा पर दोबारा संदेह जताया जा रहा है। अमेरिकी वित्तीय तंत्र में आतंकी और धन शोधन के जोखिम बढऩे की आशंका के साथ भारत से मुहैया कराई जा रही आउटसोर्सिंग सेवाएं संदिग्ध मानी जा रही हैं। ताजा मामला ब्रिटिश बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड का है। इससे पहले दिग्गज बैंक एचएसबीसी के भारतीय कर्मी अमेरिकी जांच से गुजर रहे हैं।
अमेरिकी संसद की स्थायी समिति द्वारा जारी एचएसबीसी के भारतीय कर्मियों की जांच के बाद अब स्टैंडर्ड चार्टर्ड का भारतीय कर्मचारी भी इस जांच के दायरे में आ गया है। न्यूयॉर्क राज्य वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सोमवार को स्टैंडर्ड चार्टर्ड को 'उद्दंड संस्थान' करार देते हुए उसे ईरानी सरकार के साथ 'गठजोड़' के तहत काम करने वाला बताया। डीएफएस ने तकरीबन 10 साल के दौरान 60,000 ईरानी गुप्त लेनदेनों में 250 अरब रुपये पर सवाल उठाया है। वहीं इस मसले पर सफाई देते हुए स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा, 'डीएफएस जो कह रहा है, वैसी गतिवधियों में बैंक का कोई विश्वास नहीं है और वह इससे जुड़े तथ्यों की सही तस्वीर पेश करेगा।'
डीएफएस की जांच में पाया गया कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने न्यूयॉर्क को मई 2010 में आश्वस्त किया था कि वह अमेरिकी विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण (ओएफएसी) प्रावधानों के तहत तुरंत उचित कदम उठाएगा। हालांकि एक अन्य नियामकीय जांच में वर्ष 2011 में यह पता लगा कि धन शोधन प्रावधानों का व्यापक स्तर पर उल्लंघन किया जा रहा है। इनमें से एक यही है कि बैंक, 'न्यूयॉर्क शाखा के लिए ओएफएएसी से जुड़ी अपनी पूरी अनुपालन प्रक्रिया का भारत में चेन्नई से संचालन कर रहा था, जिसमें चेन्नई और न्यूयॉर्क दफ्तरों के बीच संवाद पर कोई खास निगरानी तंत्र नहीं बनाया गया।' इसमें ईरान के साथ अमेरिका के तल्ख संबंधों की भी भूमिका देखी जा रही है। अमेरिका ने ईरान के साथ किसी भी तरह के व्यापारिक रिश्तों पर प्रतिबंध लगा रखा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने डीएफसी के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। हालांकि इसका असर स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी के शेयरों पर भी पड़ा। लंदन में इसके शेयर में भारी गिरावट आई तो भारत में उसके इंडियन डिपॉजिटरी रिसीट्स (आईडीआर) में तकरीबन 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
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