| स्पेक्ट्रम नीलामी से 1 लाख 33 हजार करोड़ रु. की आय | | सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली August 07, 2012 | | | | |
सरकार 2जी स्पेक्ट्रम नीलामी के दौरान यदि सभी दूरसंचार ऑपरेटरों पर कैबिनेट द्वारा मंजूर किस्तों में भुगतान योजना लागू करती है तो उसे अगले 12 वर्षों में 1,33,000 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी होगी। ऐसे में सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी के अपने बजटीय लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगी।
सरकार ने राजकोषीय घाटा को नियंत्रित करने के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी से 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। किस्तों से सरकार को अगले 10 वर्षों तक हर साल 9,100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी जिसका वास्तव में अनुमान नहीं लगाया गया है। सभी दूरसंचार ऑपरेटर यदि अग्रिम भुगतान करते हैं तो सरकार इस वित्त वर्ष के लिए बजटीय लक्ष्य 79,400 करोड़ रुपये से अधिक रकम जुटा लेगी। लेकिन ऐसे में अगले 10 वर्षों तक तय राजस्व की प्राप्ति नहीं हो सकेगी। इन आंकड़ों को हासिल करने के लिए नीलामी की रकम सरकार द्वारा तय 5 मेगाहट्र्ज के लिए 14,000 करोड़ रुपये के आधार मूल्य से 1.4 गुना अधिक होनी चाहिए। साथ ही नीलामी के लिए रखे जाने वाले सभी स्पेक्ट्रम के खरीदार भी होना जरूरी है।
सिंगापुर के जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्युशनल सिक्योरिटीज लिमिटेड के वरिष्ठ दूरसंचार विश्लेषक संजय चावला जो विभिन्न सरकारी राजस्व परिदृश्यों के लिए काम कर चुके हैं, ने कहा, 'हमारा मानना है कि जबतक रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में नया कारोबार शुरू नहीं करेंगी तबतक मेट्रो और ए श्रेणी के सर्किलों में सभी स्पेक्ट्रम के खरीदार नहीं मिलेंगे।' हालांकि खबरें आ रही हैं कि आरआईएल देशभर में स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाएगी। सरकार ने 1,800 मेगाहट्र्ज बैंड में 13.75 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम की पेशकश की है और 700 मेगाहट्र्ज बैंड में अधिकतम 5 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम की पेशकश की गई है। इसमें तीन नए ऑपरेटर होंगे। दो जीएसएम ऑपरेटरों में प्रत्येक को 5 मेगाहट्र्ज और एक सीडीएमए ऑपरेटर को 2.5 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम की पेशकश की जाएगी। जीएसएम ऑपरेटरों को 33 फीसदी रकम का अग्रिम भुगतान करना होगा जबकि सीडीएमए ऑपरेटरों को 25 फीसदी अग्रिम भुगतान का प्रावधान है।
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