| अरंडी और धनिए से दूर रहिए! | | अनिंदिता डे / मुंबई August 07, 2012 | | | | |
पिछले महीने के अंत में विभिन्न जिंसों पर मार्जिन लगाने के बाद वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) की कार्रवाई का अगला शिकार अरंडी और धनिया हो सकता है। सूत्रों के अनुसार मार्जिन लगाने के बावजूद अरंडी में अस्थिरता है। अरंडी के एक प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में कम बारिश के चलते उत्पादन पर असर पडऩे की अटकलों के कारण एक दिन पहले ही इस पर मार्जिन लगाया गया है।
वहीं वायदा बाजार आयोग नियामक ने आलू के बाद अगस्त में एक्सपायर हो रहे हल्दी के नजदीकी महीने के अनुबंध में ताजा खरीद-बिक्री या कारोबार पर रोक लगा दी है। सूत्रों ने कहा, 'पिछले साल हल्दी की भारी आवक हुई थी और कीमतों में गिरावट आई थी। लेकिन हल्दी के लंबे समय तक खराब न होने से कारोबारियों ने इसका स्टॉक किया था और अब पिछले साल की तुलना में हल्दी की रकबा घटने के समय वे ऊंची कीमतों का फायदा उठा रहे हैं।'
एक्सचेजों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर निर्देशों का उल्लंघन कर कोई भी वित्तीय फायदा उठाया गया तो यह धन निवेशक सुरक्षा कोष में जमा कर दिया जाएगा, न कि कारोबारी सदस्य को दिया जाएगा।
पिछले महीने नियामकीय कारवाई के दौरान एफएमसी ने हल्दी अनुबधों में खरीद पॉजिशन पर कैश मार्जिन 20 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया था। बेहतर डिलिवरी को प्रोत्साहित करने और विक्रेताओं के डिलिवरी डिफाल्ट को रोकने के लिए जिंस नियामक ने प्री-एक्सपायरी मार्जिन 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी रोजाना किया था और इसे हल्दी और इलायची में अनुबंध की एक्सपायरी से पहले 5 दिन के बजाय 7 दिन किया था। हालांकि हल्दी की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है और यह करीब 6,110 से 6,816 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही है। एक महीने पहले इसकी कीमतें करीब 4,100 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थीं और स्पेशल मार्जिन और डिलिवरी डिफॉल्ट मार्जिन के रूप में नियामकीय प्रतिबंधों से पहले हल्दी की कीमतें 5,926 से 6,260 रुपये प्रति क्विंटल की सीमा में थीं।
दूसरी ओर अरंडी की कीमतें जुलाई की शुरुआत के बाद 3,350 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 4,500 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई हैं। वहीं धनिये की कीमतें जुलाई में 2,500 रुपये प्रति क्विंटल थीं, जो बढ़कर इस समय 2,892 से 2,900 हो गई हैं।
सूत्रों ने कहा कि धनिए और अरंडी पर कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि कुछ सौदे पॉजिशन के केंद्रीकरण का संकेत दे रहे हैं, जिन्हें अगर नियंत्रित नहीं किया गया तो सटोरिया गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। एफएमसी अरंडी पर पहले ही स्पेशन मार्जिन लगा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ट्रेडिंग पॉजिशन और कीमतों में नरमी नहीं आ रही है। अरंडी के प्रमुख उत्पादक राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में सूखे की वजह से इसके कम उत्पादन के अनुमान के कारण कारोबारी इस पर दांव लगा रहे हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार के अधिकारियों का मानना है कि किसान उन क्षेत्रों में अरंडी की बुआई शुरू करेंगे जहां मूंगफली और सोयाबीन की फसल खराब हो गई है। इसलिए बाजार के लिए चिंता की एक वजह है।
|