| प्याज की कीमतें ला सकती हैं आंसू | | रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली August 07, 2012 | | | | |
पर्याप्त भंडारण के दम पर अब तक भले ही प्याज पिछले साल जितना महंगा न हुआ हो, लेकिन इसका बढ़ता निर्यात आगे के लिए चिंताजनक है। बारिश देर से होने और उम्मीद से कम होने के कारण खरीफ सत्र के दौरान प्याज का उत्पादन घटने की आशंका है। नई फसल भी महीने भर देर से आएगी। इसलिए प्याज की मांग और आपूर्ति का गणित गड़बड़ा सकता है और दाम आसमान पर पहुंच सकते हैं।
पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल प्याज का निर्यात करीब 40 फीसदी बढ़ चुका है। इसकी प्रमुख वजह न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) पर लगी बंदिश खत्म होना है। इस वक्त प्याज का भंडार भी पर्याप्त है, जिसके कारण निर्यात को पंख लग रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष जुलाई में करीब 1.68 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल जुलाई में आंकड़ा 1.20 लाख टन ही था। इस बार पहले चार महीने में ही 6.53 लाख टन प्याज का निर्यात हो चुका है, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में 5.50 लाख टन प्याज विदेश गया था।
पिंपलगांव मंडी के प्याज कारोबारी महेंद्र ठक्कर भी मानते हैं कि निर्यात बढऩे की वजह से ही प्याज महंगा हो रहा है। इस वक्त प्याज के थोक भाव 550 से 700 रुपये प्रति क्विंटल हैं। महीने भर में ही इनके भाव 150 से 200 रुपये चढ़ चुके हैं। मार्च के मुकाबले इसके भाव दोगुने हो चुके हैं। ठक्कर के मुताबिक खरीफ फसल को नुकसान की आशंका से दाम में कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल इजाफा और हो सकता है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास संघ (एनएचआरडीएफ) के निदेशक आर पी गुप्ता ने बताया कि देश में अब भी 18 लाख टन प्याज का भंडार मौजूद है, जो आगे की खपत के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि देश भर में प्याज का थोक भाव इस समय 500 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल है। लागत को देखते हुए इसे ज्यादा कीमत नहीं कहा जाएगा।
|