| कमान संभालने की होड़ में उद्यम अटका! | | शुभाशिष / मुंबई August 03, 2012 | | | | |
सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी और रूसी इस्पात कंपनी सेवरस्ताल के संयुक्त उपक्रम के बारे में भले ही काफी बातें की गई हों, लेकिन किसी के भी अल्पांश शेयरधारक बनने को राजी नहीं होने के कारण इसके चालू होने की उम्मीदें क्षीण होती नजर आ रही हैं।
दोनों कंपनियों ने वर्ष 2010 में एक भागीदारी समझौते पर दस्तखत किए थे और कर्नाटक में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 30 लाख टन क्षमता वाला इस्पात संयंत्र लगाने के लिए 2011 के अंत में एक संयुक्त उपक्रम कंपनी बनाई थी। संयुक्त उपक्रम में दोनों ही कंपनियों की बराबर भागीदारी है, जिसमें एनएमडीसी को इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति किया जाना प्रस्तावित है और सेवरस्ताल अपनी रूसी खदानों से निकलने वाले कोकिंग कोयले की आपूर्ति करेगी। हालांकि, सेवरस्ताल संयुक्त उपक्रम में बहुलांश हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रही है, जो एनएमडीसी के लिए स्वीकार्य नहीं है।
मई में एनएमडीसी ने कहा था कि दोनों कंपनियों द्वारा स्वामित्व संबंधी मसलों को जून-जुलाई तक हल किए जाने का अनुमान है लेकिन ऐसा लगता है कि यह मुद्दा अभी तक अटका हुआ है। एनएमडीसी ने इस मसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
समझौते के मुताबिक बाद के चरण में संयंत्र की क्षमता को 50 लाख टन तक बढ़ाया जा सकता है। मूल शिड्यूल के मुताबिक संयंत्र में वर्ष 2017 तक उत्पादन चालू होना है।
इस्पात क्षेत्र पर नजर रखने वाले एक विश्लेषक ने कहा, 'कंपनी पर नियंत्रण पाने की खींचतान के कारण यह समयसीमा काफी नजदीक नजर आती है।' संयुक्त उपक्रम करार में यह भी कहा गया है कि कच्चे माल की आपूर्ति के लिए दोनों ही कंपनियां सहायक कंपनियां बनाएंगी।
ये दोनों ही सहायक कंपनियां भी ढुलाई संबंधी मुद्दों में अटक गई हैं क्योंकि सेवरस्ताल के लिए जिस बंदरगाह पर कोकिंग कोयले को उतारा जाना संभावित है, वह प्रस्तावित संयंत्र से खासा दूर है। एनएमडीसी ने भी साफ कर दिया है कि वह अपनी वर्तमान खदानों के लौह अयस्क को इसमें इस्तेमाल नहीं करेगी और कंपनी ने सरकार से अन्य खदानों का आवंटन करने की मांग की है, जिसके लौह अयस्क को विशेष रूप से कर्नाटक में प्रस्तावित संयंत्र में इस्तेमाल किया जा सके।
संयंत्र के लिए 2,880 एकड़ जमीन की जरूरत है और एनएमडीसी इसके लिए पहले ही कर्नाटक सरकार को अग्रिम भुगतान कर चुकी है।
एनएमडीसी लगाकार एकीकरण की रणनीति पर बढ़ रही है और नवरत्न कंपनी ने छत्तीसगढ़ में 30 लाख टन क्षमता वाले इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए काम शुरू कर दिया है।
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